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RBI की बड़ी कार्रवाई, 3 बैंक और एक फाइनेंस कंपनी पर लगा भारी जुर्माना, ये है वजह 

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आरबीआई ने 3 बैंकों के साथ-साथ एक एनबीएफसी पर भी पेनल्टी लगाई। नियमों का उल्लंघन होने पर केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। आइए जानें कहीं इसमें से किसी एक में आपका अकाउंट तो नहीं?
RBI की बड़ी कार्रवाई, 3 बैंक और एक फाइनेंस कंपनी पर लगा भारी जुर्माना, ये है वजह 

एक बार फिर रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। महाराष्ट्र, ओडिशा और त्रिपुरा में स्थित एक-एक बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा विनायक कैपसेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी आरबीआई ने सख्ती दिखाई है। सभी पर नियमों का सही से अनुपालन न करने का आरोप है। इस बात की जानकारी केंद्रीय बैंक ने 5 फरवरी 2026 को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है।

महाराष्ट्र में स्थित डाउंड अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। द जेपोर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड ओडिशा और त्रिपुरा में स्थित अगरतला को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड पर 2-2 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।

सभी बैंकों के वित्त स्थिति को चेक करने के लिए मार्च 2025 में एक निरीक्षण किया था। इस दौरान आरबीआई को दिशानिर्देशों में के अनुपालन में खामियों का पता चला। जिसके बाद सभी बैंकों और कंपनी पर को नोटिस कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर प्राप्त  लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्ततियों के आधार पर आरोप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला आरबीआई ने लिया।

क्या है वजह?

अगरतला को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड में प्रूडेंशियल इंटर बैंक (ग्रॉस) एक्स्पोज़र लिमिट और प्रूडेंशियल इंटर बैंक काउंटर पार्टी लिमिट का उल्लंघन किया था। द जेपोर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड ओडिशा पर भी यही आरोप है।

डाउंड अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में क्रेडिट इनफॉरमेशन रिपोर्टिंग पर जारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया। बैंक ने किसी भी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी को ग्राहकों की क्रेडिट जानकारी जमा नहीं कर पाया। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियमों के अनुपालन में खामियों पर आधारित है। इसलिए इसका असर ग्राहक और बैंकों/कंपनी के बीच हो रहे किसी भी एग्रीमेंट या लेनदेन पर नहीं पड़ेगा।

एनबीएफसी ने तोड़े ये नियम 

विनायक कैपसेक प्राइवेट लिमिटेड पर आरबीआई ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी अपने पेड- इक्विटी कैपिटल से 26% से अधिक शेयर होल्डिंग में बदलाव करने के लिए आरबीआई से पूर्व लिखित अनुमति नहीं ली। ऐसे में केंद्रीय बैंक द्वारा जारी “शेयर होल्डिंग या कंट्रोल के अधिकरण” पर जारी कुछ दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ। व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान आरोपों की पुष्टि हुई। जिसके बाद इस पर पेनल्टी लगाना सही समझ गया।

यहाँ देखें आरबीआई का नोटिफिकेशन