नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 26 फरवरी को म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए कई बड़े नियमों में बदलाव की घोषणा की है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए बनाई गई विशेष योजनाओं पर पड़ेगा। सेबी ने ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड’ कैटेगरी को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है।
इन बदलावों का उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना और फंड मैनेजमेंट में अधिक पारदर्शिता लाना है। अब तक सॉल्यूशन ओरिएंटेड कैटेगरी में चल रही स्कीमें नया निवेश नहीं ले पाएंगी। इन योजनाओं को समान जोखिम प्रोफाइल वाली अन्य मौजूदा स्कीमों में मर्ज कर दिया जाएगा।
इक्विटी फंड्स के लिए निवेश की नई सीमाएं
सेबी ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के लिए निवेश के नियमों को और कड़ा कर दिया है, ताकि स्कीमें अपने नाम के अनुरूप ही निवेश करें।
मल्टी कैप फंड्स: इन फंड्स को अब अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 75% हिस्सा इक्विटी में निवेश करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप-तीनों में न्यूनतम 25-25% का निवेश रखना जरूरी होगा।
लार्ज कैप और लार्ज एंड मिड कैप फंड्स: लार्ज कैप फंड्स के लिए अपनी कुल संपत्ति का न्यूनतम 80% लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करना होगा। वहीं, लार्ज एंड मिड कैप स्कीमों को लार्ज और मिड कैप, दोनों श्रेणियों में कम से कम 35-35% का आवंटन सुनिश्चित करना होगा।
पोर्टफोलियो ओवरलैप पर लगेगी लगाम
अक्सर देखा जाता है कि एक ही फंड हाउस की दो अलग-अलग स्कीमों में लगभग एक जैसे ही शेयर होते हैं, जिससे निवेशकों को विविधीकरण का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इस समस्या से निपटने के लिए सेबी ने पोर्टफोलियो ओवरलैप पर 50% की सीमा तय कर दी है। फंड हाउसों को इस ओवरलैप को कम करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। साथ ही, उन्हें हर महीने अपनी वेबसाइट पर ओवरलैप का डेटा भी सार्वजनिक करना होगा।
सॉल्यूशन ओरिएंटेड की जगह लेंगे ‘लाइफ साइकिल फंड्स’
सेबी ने रिटायरमेंट और बच्चों के भविष्य जैसी योजनाओं के लिए एक नई कैटेगरी ‘लाइफ साइकिल फंड्स’ पेश की है। ये फंड्स निवेशक की उम्र और लक्ष्य की अवधि के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो का जोखिम खुद-ब-खुद समायोजित करेंगे। उदाहरण के लिए, जब निवेश की मैच्योरिटी नजदीक आएगी, तो फंड अपने आप इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश बढ़ा देगा, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो।
डेट और हाइब्रिड फंड्स में भी हुए बदलाव
सेबी ने डेट और हाइब्रिड फंड्स के नियमों को भी अधिक स्पष्ट किया है। विशेष परिस्थितियों में, डेट फंड मैनेजर अब पोर्टफोलियो की अवधि को घटा सकेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें ट्रस्टियों को एक लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। इसके अलावा, हाइब्रिड फंड्स को अब इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, गोल्ड और सिल्वर ETF जैसी संपत्तियों में निवेश करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।






