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भारत से MBBS करने वाले कनाडा में कैसे बनें डॉक्टर? MCCQE एग्जाम और लाइसेंसिंग समेत जानें पूरी प्रक्रिया

Written by:Banshika Sharma
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अगर आपने भारत से MBBS की डिग्री ली है और कनाडा में मेडिकल प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो यह सीधे संभव नहीं है। इसके लिए भाषा की परीक्षा से लेकर कई कड़े मेडिकल एग्जाम और लंबी रेजीडेंसी ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। आइए जानते हैं इसकी पूरी स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया।
भारत से MBBS करने वाले कनाडा में कैसे बनें डॉक्टर? MCCQE एग्जाम और लाइसेंसिंग समेत जानें पूरी प्रक्रिया

भारत में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कई डॉक्टर बेहतर भविष्य के लिए विदेश का रुख करते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के साथ-साथ कनाडा भी भारतीय डॉक्टरों के लिए एक पसंदीदा जगह है। हालांकि, भारत की MBBS डिग्री के आधार पर कनाडा में सीधे प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं है। इसके लिए एक तयशुदा और कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई परीक्षाएं, ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग शामिल हैं।

कनाडा में डॉक्टर के तौर पर काम करने के लिए भारतीय मेडिकल स्नातकों को यह साबित करना होता है कि उनकी मेडिकल नॉलेज और स्किल्स कनाडाई मानकों के अनुरूप हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ साल लग सकते हैं।

पहला कदम: भाषा की परीक्षा और डिग्री वेरिफिकेशन

कनाडा में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए सबसे पहली शर्त वहां की आधिकारिक भाषाओं, अंग्रेजी या फ्रेंच, में से किसी एक पर मजबूत पकड़ होना है। इसके लिए IELTS (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) या TEF Canada जैसी परीक्षाओं में अच्छा स्कोर लाना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि डॉक्टर मरीजों और सहकर्मियों के साथ सही ढंग से संवाद कर सकें।

भाषा की बाधा पार करने के बाद अगला कदम अपनी MBBS की डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट्स को वेरिफाई कराना होता है। यह प्रक्रिया physiciansapply.ca पोर्टल के जरिए पूरी की जाती है, जो यह प्रमाणित करता है कि आपकी डिग्री कनाडा में मान्य है। इस वेरिफिकेशन के बिना आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती।

मेडिकल नॉलेज के लिए MCCQE और NAC एग्जाम

डिग्री वेरिफिकेशन के बाद उम्मीदवारों को दो महत्वपूर्ण परीक्षाएं पास करनी होती हैं। पहली, मेडिकल काउंसिल ऑफ कनाडा क्वालिफाइंग एग्जामिनेशन (MCCQE) पार्ट I, जो एक थ्योरी आधारित परीक्षा है। दूसरी, नेशनल असेसमेंट कोलैबोरेशन (NAC) एग्जाम, जिसमें उम्मीदवार के क्लिनिकल स्किल्स का मूल्यांकन किया जाता है। इन परीक्षाओं से यह तय होता है कि उम्मीदवार की मेडिकल जानकारी कनाडा के स्टैंडर्ड के मुताबिक है या नहीं।

CaRMS के जरिए रेजीडेंसी प्रोग्राम

MCCQE पार्ट I और NAC एग्जाम पास करने के बाद सबसे अहम पड़ाव आता है रेजीडेंसी का। कनाडा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए कैनेडियन रेजिडेंट मैचिंग सर्विस (CaRMS) के माध्यम से रेजीडेंसी प्रोग्राम के लिए आवेदन करना होता है। यह एक मैचिंग सर्विस है जो उम्मीदवारों को उनकी विशेषज्ञता और स्कोर के आधार पर विभिन्न अस्पतालों में रेजीडेंसी स्लॉट दिलाती है। यह रेजीडेंसी प्रोग्राम 2 से 6 साल तक का हो सकता है, जो चुनी गई स्पेशलाइजेशन पर निर्भर करता है।

आखिरी परीक्षा और लाइसेंसिंग

रेजीडेंसी प्रोग्राम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद MCCQE पार्ट II की परीक्षा पास करनी होती है। इसके बाद, स्पेशलाइजेशन के आधार पर सर्टिफिकेशन हासिल करना होता है। फैमिली फिजिशियन के लिए कॉलेज ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ कनाडा (CFPC) से और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स ऑफ कनाडा (RCPSC) से सर्टिफिकेशन लेना पड़ता है।

इन सभी चरणों को पूरा करने के बाद आखिर में जिस प्रांत में आप प्रैक्टिस करना चाहते हैं, वहां की मेडिकल रेगुलेटरी अथॉरिटी से लाइसेंस लेना होता है। लाइसेंस मिलने के बाद ही कोई भारतीय डॉक्टर कनाडा में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकता है।

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Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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