सैनिक स्कूल में करवाना चाहते हैं बच्चे का एडमिशन, जानें प्रक्रिया और फीस

सैनिक स्कूल देश के प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूल में से एक है जहां बच्चों को अनुशासित माहौल में शिक्षा और देश भक्ति एक साथ सिखाई जाती है। चलिए इस स्कूल के एडमिशन प्रक्रिया और फीस के बारे में जान लेते हैं।
Sainik School

हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतरीन भविष्य देना चाहते हैं। यही कारण है की शुरुआत से उनकी पढ़ाई लिखाई पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाता है। यह तो हम सभी जानते हैं कि अगर स्कूली शिक्षा बच्चों को अच्छी तरह से मिल जाती है तो वह अपने आगे के करियर को फोकस के साथ ऊंचाई पर ले जा सकता है। ऐसे में हम किस स्कूल में बच्चे का एडमिशन करवा रहे हैं। वहां उसे कैसे शिक्षा दी जा रही है इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है। देश में कुछ स्कूल तो ऐसे हैं जो केवल अपनी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के लिए ही प्रसिद्ध है।

सैनिक स्कूल कुछ विशेष बोर्डिंग स्कूलों में शामिल है। जो बच्चों को बेहतरीन शिक्षा देने के साथ उन्हें अनुशासित बनाता है और देशभक्ति के गुण भी विकसित करता है। चलिए आज हम आपको इस स्कूल के बारे में जानकारी देते हैं। किस तरह से यहां एडमिशन होता है और फीस कितनी है यह सब कुछ जान लेते हैं।

कैसे होते हैं सैनिक स्कूल (Sainik School)

सैनिक स्कूल रक्षा मंत्रालय के अधीन चलाए जाते हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए, वायु सेना और नौसेना जैसी सेवाओं के लिए तैयार किया जाता है। यहां बच्चों को कक्षा छठवीं और नौवीं में प्रवेश दिया जाता है। यह स्कूल पूरी तरह से बोर्डिंग होते हैं। बच्चों को पूरे साल हॉस्टल में रहना पड़ता है। यहां वह एक अनुशासित सैन्य शैली में सारी चीजों का प्रशिक्षण हासिल करते हैं।

देनी होती है एग्जाम

हर साल इसके लिए अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा AISSEE का आयोजन किया जाता है। यह एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी NTA द्वारा करवाई जाती है। इस परीक्षा में जो छात्र पास होते हैं उनका मेडिकल टेस्ट करवाया जाता है। मेडिकल टेस्ट में पास होने के बाद इन्हें प्रवेश मिलता है। हर चीज की लिखित परीक्षा बहुत कम बच्चे पास कर पाते हैं।

कितनी है फीस

सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए कोई भी बच्चा अप्लाई कर सकता है बस उसे परीक्षा पास करनी होगी। यहां की फीस की बात करें तो सालाना फीस लगभग डेढ़ लाख तक होती है। इसमें ट्यूशन फीस से लेकर हॉस्टल, यूनिफॉर्म, मेस और अन्य तरह की सुविधाएं शामिल है। कुछ राज्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों, एससी एसटी छात्रों और रक्षा पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों के लिए छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

Diksha Bhanupriy
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Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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