पांव पखारे, चुनरी ओढ़ाई, तिलक लगाकर बागेश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किया कन्या पूजन

सनातन संस्कृति की यही विशेषता है कि यहाँ नारी की पूजनीय माना गया है, बच्चियों में देवी का स्वरुप दिखाई देता है इसलिए सनातन को मानने वाला कितना भी बड़ा या प्रसिद्द व्यक्ति क्यों ना हो वो इसका पालन करता ही है, बागेश्वर धाम में आज ऐसा ही कुछ दिखाई दिया।
Dhirendra Krishna Shastri Kanya Pujan

Bageshwar Maharaj Dhirendra Krishna Shastri Kanya Pujan: शारदीय नवरात्रि में भक्त माँ की आराधना में लगे हैं, देवी स्वरुपा कन्याओं का पूजन कर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं, बागेश्वर धाम में भी आज ऐसा ही अवसर था जहाँ बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कन्याओं के पांव पखारे, उन्हें चुनरी ओढ़ाई और तिलक लगाकर उनसे आशीर्वाद लिया।

छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शारदीय नवरात्रि में आज कन्या पूजन का कार्यक्रम किया, उन्होंने छोटी-छोटी कन्याओं को बुलाकर उनके पांव पखारे, उन्हें चुनरी ओढ़ाई, मिठाई खिलाई, दक्षिणा दी और तिलक लगाकर उनसे आशीर्वाद लिया।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किया Kanya Pujan

बागेश्वर महाराज शारदीय नवरात्रि में मौन व्रत पर हैं लेकिन वे कन्याओं से आपने स्वभाव के अनुसार हास परिहास करते दिखाई दिए, सनातन संस्कृति की यही विशेषता है कि यहाँ नारी की पूजनीय माना गया है, बच्चियों में देवी का स्वरुप दिखाई देता है इसलिए सनातन को मानने वाला कितना भी बड़ा या प्रसिद्द व्यक्ति क्यों ना हो वो इसका पालन करता ही है, बागेश्वर धाम में आज ऐसा ही कुछ दिखाई दिया।

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छतरपुर से सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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