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बागेश्वर धाम में शुरू होगा गुरुकुल, संस्कारों की पढ़ाई पर जोर

Written by:Bhawna Choubey
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बागेश्वर धाम में सनातन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने फरवरी में गुरुकुल और वेद विद्यालय शुरू करने की घोषणा की है, जहां काशी के विद्वान बच्चों को वेद-पुराण पढ़ाएंगे।
बागेश्वर धाम में शुरू होगा गुरुकुल, संस्कारों की पढ़ाई पर जोर

बागेश्वर धाम अब केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र ही नहीं रहेगा, बल्कि सनातनी शिक्षा का एक मजबूत आधार भी बनेगा। बाबा बागेश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक अहम घोषणा करते हुए बताया है कि बागेश्वर धाम में गुरुकुल और वेद विद्यालय की शुरुआत की जाएगी। यह घोषणा फरवरी में होने वाले सप्तम कन्या विवाह महोत्सव से पहले सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं और सनातन धर्म से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ा दिया है। आज के समय में जहां आधुनिक शिक्षा का बोलबाला है, वहीं सनातनी शिक्षा धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है। ऐसे में बागेश्वर धाम में गुरुकुल की स्थापना को सनातन परंपरा को जीवित रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

फरवरी में होगा गुरुकुल का शुभारंभ

बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने साफ कहा है कि इसी साल फरवरी महीने में आयोजित होने वाले सप्तम कन्या विवाह महोत्सव के दौरान बागेश्वर धाम गुरुकुल और वेद विद्यालय का उद्घाटन किया जाएगा। यह वही आयोजन है, जिसमें हर साल सैकड़ों जरूरतमंद कन्याओं का विवाह पूरे विधि-विधान से कराया जाता है। इस महोत्सव के साथ गुरुकुल की शुरुआत करना एक प्रतीकात्मक संदेश भी देता है कि समाज सेवा और शिक्षा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। बागेश्वर धाम पहले ही सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है और अब शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम उसकी भूमिका को और मजबूत करता है।

बागेश्वर धाम गुरुकुल में क्या पढ़ाया जाएगा

बागेश्वर धाम में खुलने वाले गुरुकुल में पूरी तरह सनातनी शिक्षा दी जाएगी। यहां बच्चों और बटुक ब्राह्मणों को वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद गीता जैसे ग्रंथों का अध्ययन कराया जाएगा। पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि श्लोकों का अर्थ, उनका जीवन में उपयोग और संस्कारों की शिक्षा भी दी जाएगी। आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति और ग्रंथों से जोड़ने के लिए ऐसे गुरुकुल बेहद जरूरी हैं। बागेश्वर धाम गुरुकुल का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार, अनुशासन और भारतीय परंपरा की समझ विकसित करना है।

काशी से आएंगे विद्वान शिक्षक, मिलेगा गहरा वैदिक ज्ञान

इस गुरुकुल की सबसे खास बात यह है कि यहां पढ़ाने के लिए बनारस यानी काशी से विद्वान आचार्यों और शिक्षकों को बुलाया जा रहा है। काशी को सनातन ज्ञान की राजधानी माना जाता है और वहां के विद्वानों को वेद, शास्त्र और पुराणों का गहरा ज्ञान होता है। बाबा बागेश्वर ने बताया कि ये शिक्षक छात्रों को वेद, रामायण, गीता और पुराणों की बारीकियां सिखाएंगे। इससे बागेश्वर धाम गुरुकुल की शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों मजबूत होंगी। हम देखते हैं कि जब अनुभवी और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े शिक्षक होते हैं, तो शिक्षा का प्रभाव लंबे समय तक रहता है।

‘विदेशेषु धनं विद्या’: ज्ञान को बताया सबसे बड़ा धन

गुरुकुल की घोषणा करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संस्कृत की एक प्रसिद्ध कहावत “विदेशेषु धनं विद्या” का उल्लेख किया। इसका अर्थ है कि जब इंसान घर से दूर हो या उसके पास भौतिक धन न हो, तब भी ज्ञान ही उसे संभालता है। इस कहावत के जरिए बाबा बागेश्वर ने यह संदेश दिया है कि धन, संपत्ति और सुविधाएं जीवन में कभी भी कम-ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। बागेश्वर धाम गुरुकुल इसी सोच के साथ बच्चों को शिक्षा देने का काम करेगा।

वैदिक मंत्रों से गूंजेगा बागेश्वर धाम

गुरुकुल के शुरू होने के बाद बागेश्वर धाम का माहौल और भी आध्यात्मिक हो जाएगा। बाबा बागेश्वर के अनुसार, युवा ब्राह्मण छात्र और बटुक जब वेद मंत्रों का जाप करेंगे, तो पूरा धाम वैदिक ध्वनियों से गूंज उठेगा। वैदिक मंत्रों का उच्चारण केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह मन और वातावरण दोनों को शुद्ध करने का माध्यम माना जाता है। इससे बागेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालुओं को भी एक अलग तरह की शांति और ऊर्जा का अनुभव होगा।