इटावा के सैफई में होली 2026 के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजनीतिक और सामाजिक संदेश के साथ लोगों से संवाद किया। अपने पैतृक गांव में परिजनों और समर्थकों के बीच मौजूद अखिलेश ने रंगों के त्योहार को भारतीय समाज की एकता और विविधता से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि भारत में मनाया जाने वाला रंगों का पर्व सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि साथ रहने की संस्कृति का प्रतीक है। अखिलेश यादव ने इस मौके पर महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए सत्य और अहिंसा की बात दोहराई और कहा कि इसी रास्ते ने दुनिया के कई देशों को दिशा दी।
“हम सब लोग बहुरंगी रहें, मन से भी बहुरंगी रहें।” — अखिलेश यादव
गांधी, अहिंसा और त्योहार का संदेश
सपा प्रमुख ने कहा कि भारत वही देश है जिसने दुनिया को शांति का पैगाम दिया और “जियो और जीने दो” का विचार रखा। उनके मुताबिक, यह विचार केवल नारा नहीं रहा, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाली जीवन-दृष्टि बना।
अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय समाज की खूबसूरती उसकी हिन्दुस्तानियत और भाईचारे में है। उन्होंने त्योहारों को सामाजिक संदेश का माध्यम बताते हुए कहा कि हर त्योहार अन्याय के खिलाफ जीत की बात करता है और बुराई के अंत के बाद ही उत्सव का स्वरूप सामने आता है।
कन्नौज सांसद के तौर पर युद्ध पर टिप्पणी
सैफई में बातचीत के दौरान कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जमीन की लड़ाई से पहले तकनीक के बहाने भी संघर्ष की स्थितियां बन रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक देश के राष्ट्रपति बैठक में थे, तभी एक बम आया और सबको खत्म करके चला गया, और अभी भी युद्ध जारी है।
उन्होंने कहा कि युद्ध की सूचनाएं लगातार आ रही हैं और उसका असर लोगों पर पड़ रहा है। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने साफ कहा कि समाजवादी पार्टी और समाजवादी विचारधारा कभी भी युद्ध के पक्ष में नहीं रही है और जहां भी युद्ध हो, वे उसके खिलाफ हैं।
“समाजवादी पार्टी और समाजवादी विचारधारा कभी भी युद्ध के पक्ष में नहीं रही है, युद्ध नहीं होना चाहिए।” — अखिलेश यादव
सोशल मीडिया पर भी दोहराया संदेश
सैफई में होली मनाने के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं। पोस्ट में उन्होंने संक्षेप में लिखा: “मन से बहुरंग रहें!” यह वही संदेश था जिसे उन्होंने अपने सार्वजनिक संवाद में भी रखा—रंग, विविधता और सह-अस्तित्व को सामाजिक शक्ति के रूप में देखने का आग्रह।
उत्तर प्रदेश समेत देशभर में होली के उत्सव के बीच सैफई से आया यह संदेश राजनीतिक बयान से आगे जाकर सामाजिक संदर्भ भी रखता है—भाईचारे, अहिंसा और युद्ध-विरोध की रेखा पर।






