छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में गोयरा थाना क्षेत्र का रामपुर घाट इन दिनों अवैध रेत खनन का एक बड़ा केंद्र बन गया है। आरोप है कि यहां यूफोरिया माइन्स रेत कंपनी द्वारा खनिज अधिकारी अमित मिश्रा के कथित संरक्षण में दिन-रात नदी का सीना चीरकर रेत का अवैध कारोबार किया जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त दिशानिर्देशों को दरकिनार करते हुए भारी-भरकम L&T मशीनों और लिफ्टों का इस्तेमाल सीधे नदी की मुख्य धारा में किया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ठेकेदार बेखौफ होकर नदी के बीच से रेत निकाल रहे हैं, जिससे न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। मशीनों के शोर और अनियंत्रित खुदाई ने नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को ধ্বংস कर दिया है।
प्रशासन की चुप्पी और पर्यावरण को भारी नुकसान
अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। नदी की धारा को मोड़ने और गहरे गड्ढे करने की वजह से बड़ी संख्या में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मौत हो रही है। इसके अलावा, भारी मशीनों से निकलने वाले तेल और कचरे से नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इस अनियंत्रित दोहन का असर आसपास के इलाकों के भू-जल स्तर पर भी पड़ रहा है, जो तेजी से नीचे गिर रहा है।
खनिज विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
पूरे क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि खनिज विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि खनिज अधिकारी अमित मिश्रा को इस पूरी गतिविधि की जानकारी है, लेकिन शिकायतों के बावजूद वे कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों की यह “खुली छूट” ही ठेकेदारों के हौसले बुलंद कर रही है।
“नदी हमारी जीवनदायिनी है, लेकिन सरकारी संरक्षण में पल रहे रेत माफिया इसे मारने पर तुले हैं। यदि जल्द ही इन मशीनों को नहीं रोका गया, तो रामपुर घाट का अस्तित्व केवल कागजों पर ही सिमट कर रह जाएगा।”- एक जागरूक स्थानीय निवासी
प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शासन इन भ्रष्ट अधिकारियों और बेलगाम खनन कंपनियों पर लगाम लगाएगा, या पर्यावरण की यह बलि यूं ही जारी रहेगी? यह देखना अभी बाकी है।





