भोपाल में किसे पैसे भिजवा रहे थे एसडीएम- ऑडियो

भोपाल में किसे पैसे भिजवा रहे थे एसडीएम- ऑडियो

छतरपुर। छतरपुर में खुद ही के ऑफिस में हमला करवा कर सुर्खियों में आये एसडीएम अनिल सकपाले पद पर बने रहने के लिए भोपाल तक पैसे भिजवा रहे थे। यह खुलासा खुद पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस द्वारा एसडीएम और एक व्यक्ति के बीच हुई बातचीत का ऑडियो जारी करने से हुआ है। इस बातचीत में व्यक्ति एसडीएम से कह रहा है कि वो उन्हें बची हुई राशि अगली बार में दे देगा लेकिन एसडीएम उसे यह कहकर पैसे तुरंत देने की कहते हैं कि जो पैसा उस व्यक्ति ने पहले दिया था उसे वह आगे भिजवा चुके हैं। इतना ही नहीं एसडीएम आगे बातचीत में कहते हैं कि भोपाल मे सेक्शन ऑफिसर को दस हजार रूपये देने हैं ताकि आदेश जल्द से जल्द निकल आये।

अब सवाल यह है कि एसडीएम साहब किस आदेश के निकलने की बात कर रहे हैं और आखिर वह सेक्शन ऑफिसर कौन है जिसके माध्यम से यह आदेश निकलना था। हैरत की बात यह है कि कुछ दिन पहले ही एसडीएम को शिकायतों के चलते छतरपुर से तबादला कर दिया गया था लेकिन वह उस पर स्टे आर्डर ले आए थे और उसके बाद कलेक्टर ने उन्हें एक बार फिर छतरपुर एसडीएम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं कि आखिरकार माफियाओं पर कार्यवाही के नाम पर एसडीएम मनमानी करते रहे और कलेक्टर आंखें बंद करें क्यों बैठे रहे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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