लॉकडाउन में SP की अनूठी मुहिम, बुजुर्गों का सहारा बनेगी छतरपुर पुलिस

लॉकडाउन में SP की अनूठी मुहिम, बुजुर्गों का सहारा बनेगी छतरपुर पुलिस

छतरपुर।संजय अवस्थी।

जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कोरोना महामारी के दौरान घरों में अकेले और असहाय बुजुर्गों की मदद के लिए अनूठी मुहिम शुरु की है। इस मुहिम का नाम संकल्प रखा गया है। मुहिम के अंतर्गत पुलिस ऐसे बुजुर्गों को चिन्हित करेगी जो लॉकडाउन या अन्य परेशानियों के कारण घर में अकेले हैं और उन्हें विभिन्न चीजों और मदद की आवश्यकता पड़ती है। इन बुजुर्गों को पुलिस एक हेल्पलाइन नंबर देगी जिस पर फोन लगाकर बुजुर्ग अपनी मदद के लिए संबंधित थाने को पुलिसकर्मियों को बुला सकते हैं।

इन सेवाओं को उपलब्ध कराएंगे पुलिसकर्मी
एसपी सचिन शर्मा ने सोमवार को एक पत्रकारवार्ता के माध्यम से इस मुहिम की जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि घर में अकेले रह रहे बुजुर्गों की 7 प्रमुख आवश्यकताओं को इस सेवा मुहिम में शामिल किया गया है जिसके तहत मोबाइल या टीवी रीचार्ज, किराना, सब्जी, दवाईयों की डिलेवरी, मेडिकल चैकअप की व्यवस्था, टेलीमेडिसिन के माध्मय से डॉक्टर द्वारा चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक ऑनलाइन कार्य, घर में बुनियादी चीजों के रिपेयर कराने, गेहूं, धनिया, मिर्च पिसवाने जैसे सेवा कार्य पुलिस के द्वारा किए जाएंगे।

पुलिस की छवि बदलने गेहूं-धनिया भी पिसवाएंगे पुलिसकर्मी
एसपी ने बताया कि महामारी के समय में सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा हमारे बुजुर्गों को है। हमारी कोशिश है कि इस महमारी के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय तक बुजुर्ग घर में ही रहें। बाहर से किए जाने वाले आवश्यक कार्य भी उन्हें न करने पड़ें। इस तरह का एक प्रयास वे उमरिया में कर चुके हैं। जिसमें लॉकडाउन के दौरान उन्होंने लगभग 300 बुजुर्गों को चिन्हित कर लगभग 3 महीने तक यही सेवाएं उपलब्ध कराईं। इससे समाज में पुलिस की छवि भी सुधरती है। साथ ही बुजुर्गों को बीमारी से भी बचाया जा सकता है। बुजुर्गों का चुनाव पुलिस अपने स्तर पर ही करेगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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