
‘करसाय ता बस्तर, बरसाय ता बस्तर’ (खेलेगा बस्तर, जीतेगा बस्तर) के नारे के साथ बस्तर ओलंपिक की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने एक बैठक में इस आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। इस साल भी यह भव्य आयोजन पूरे उत्साह के साथ होगा, जिसका उद्देश्य बस्तर को खेलों के माध्यम से नई पहचान दिलाना है। यह आयोजन न केवल खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास का माहौल भी बनाएगा।
उपमुख्यमंत्री और खेल मंत्री अरुण साव ने कहा कि बस्तर ओलंपिक सिर्फ खेलों का मंच नहीं, बल्कि विकास और खेल का अनूठा संगम है। इसका लक्ष्य बस्तर के युवाओं में नेतृत्व और आत्मविश्वास की भावना जगाना है। राज्य सरकार खेलों और उत्सवों के जरिए बस्तर में भय के माहौल को समाप्त कर सभी को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना चाहती है। यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बस्तर ओलंपिक
आगामी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बस्तर ओलंपिक में संभाग के सात जिलों और 32 विकासखंडों से 40 हजार से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह प्रतियोगिताएं विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित होंगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर गांव से अधिक से अधिक खिलाड़ियों को शामिल किया जाए ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े। उन्होंने जल्द ही बस्तर में बैठक कर तैयारियों को और तेज करने को कहा, ताकि आयोजन की सफलता सुनिश्चित हो सके।
बस्तर ओलंपिक में 11 खेल शामिल
बस्तर ओलंपिक में 11 खेल शामिल होंगे, जिनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच शामिल हैं। जूनियर और सीनियर वर्गों के साथ-साथ महिला और पुरुष दोनों श्रेणियों में मुकाबले होंगे। खास बात यह है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांगों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए विशेष प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। पिछले साल के विजेता खिलाड़ी, पंचायत सचिव और महिला समूह भी इस आयोजन से जुड़ेंगे, जिससे यह समावेशी और व्यापक बनेगा।
