छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को रायपुर स्थित महानदी भवन में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और हरित ऊर्जा को लेकर कई बड़े फैसलों को स्वीकृति दी गई। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों को मंजूरी दी।
बैठक में “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति, 2026” के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई है। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस कचरे तथा अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन करते हुए उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित किया जाएगा। इससे अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
साय कैबिनेट ने तीन अहम प्रस्तावों को दी मंजूरी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना
- वीबी-जीरामजी योजना छत्तीसगढ़ के प्रारूप को मंजूरी
- छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति, 2026 के प्रारूप को भी मंजूरी
बैठक में वीबी-जी राम जी योजना को स्वीकृति
साय कैबिनेट ने “विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी योजना” छत्तीसगढ़ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
इस योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना के विकास, आजीविका आधारित परिसंपत्तियों के निर्माण तथा टिकाऊ रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण और प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के साथ बेहतर समन्वय को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार के व्यय का अनुपात 60:40 रहेगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में इस योजना हेतु 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
“अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना लागू करने का निर्णय
साय कैबिनेट बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर निर्मित करने के उद्देश्य से “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र आदि), विपणन केंद्र तथा आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 को स्वीकृति
आयोजित बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसले को मंजूरी दी गई है। मंत्रिमंडल ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप को भी स्वीकृति दी है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा।
इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना है।
मंत्रिपरिषद की बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय…@vishnudsai @ChhattisgarhCMO pic.twitter.com/KNMHekdNRL
— Arun Sao (@ArunSao3) June 23, 2026





