छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान में सुरक्षाबलों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। पिछले 48 घंटों के भीतर कुल 81 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। यह राज्य में अब तक के सबसे बड़े आत्मसमर्पण अभियानों में से एक है, जिससे बस्तर में माओवादी संगठन की कमर टूट गई है।
राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ (नई सुबह, नई शुरुआत) नीति के तहत यह कामयाबी मिली है। आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े और इनामी कैडर भी शामिल हैं, जो दशकों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे।
1.41 करोड़ के इनामी कैडरों ने डाले हथियार
जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले 81 नक्सलियों में से 52 माओवादी साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो के सक्रिय सदस्य थे। इन पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों ने इसे एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि बताया है, क्योंकि इससे संगठन के नेतृत्व और नेटवर्क को गहरा झटका लगा है। इन कैडरों का हथियार डालना यह दिखाता है कि नक्सली अब खोखली विचारधारा से तंग आ चुके हैं और विकास के रास्ते पर लौटना चाहते हैं।
भविष्य बंदूक से नहीं, विकास से बनेगा: CM साय
इस बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक जीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।
“बस्तर में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है। जहां कभी भय और भ्रम का माहौल था, वहां अब शासन की सशक्त उपस्थिति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच ने लोगों में भरोसा पैदा किया है।” — विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत हिंसा छोड़कर लौटने वाले सभी युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर दिए जा रहे हैं। यह आत्मसमर्पण उसी भरोसे का प्रमाण है।
नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प हो रहा साकार
सीएम साय ने इस कामयाबी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा है, जहां सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और शासन की पहुंच लगातार मजबूत हो रही है।





