छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और सुरक्षाबलों की तैनाती पर राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। बस्तर से सुरक्षाबलों की वापसी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला है। साव ने सीधा आरोप लगाया है कि भूपेश बघेल कभी नहीं चाहते थे कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो। उन्होंने कहा कि बघेल को प्रदेश के विकास और खुशहाली से कोई लेना-देना नहीं था।

उप मुख्यमंत्री साव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूपेश बघेल की सरकार में पुलिस और सुरक्षा जवानों के हाथ बांध दिए गए थे। सुरक्षाबलों को अपनी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता नहीं दी गई, जिसके कारण नक्सल विरोधी अभियानों पर सीधा असर पड़ा। उन्होंने दावा किया कि जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब नक्सलियों ने खुशी मनाई थी। साव ने आगे कहा कि आज भी भूपेश बघेल और उनकी पार्टी की मंशा बार-बार साफ हो रही है कि वे नक्सलवाद को खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नई रणनीति के साथ काम कर रही है।

अरुण साव ने सुरक्षाबलों की वापसी पर स्थिति स्पष्ट की

सुरक्षाबलों की वापसी के सवाल पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा। जब बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएंगे, तभी जवानों की वापसी पर विचार किया जाएगा। इसका मतलब है कि सरकार सुरक्षा स्थिति को मजबूत किए बिना कोई कदम नहीं उठाएगी। यह फैसला राज्य की सुरक्षा और शांति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

आत्मसमर्पण करने वालों के लिए बेहतर पुनर्वास नीति बनाई- अरुण साव

नक्सल प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर भी सरकार की योजनाएं तैयार हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने बताया कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए एक बेहतर पुनर्वास नीति बनाई है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसमें शिक्षा, रोजगार और अन्य सामाजिक सहायता जैसे पहलू शामिल हैं। सरकार का मानना है कि पुनर्वास नीति से नक्सलियों को हथियार डालने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और शांति बहाली में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही, सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। इन इलाकों में अक्सर विकास और सरकारी सुविधाओं की कमी रहती है। सरकार की कोशिश है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक तक पहुंचें। ऐसा करके सरकार का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों के लोगों का जीवन स्तर सुधरे और वे नक्सलियों के प्रभाव से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ सकें। यह पहल नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जहां केवल बल प्रयोग ही नहीं, बल्कि विकास और जन-कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।