छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को एक बार फिर डिजिटल फ्रॉड से सावधान रहने की चेतावनी दी है। यहां एक रेलवे कर्मचारी को ओवरस्पीड चालान का फर्जी मैसेज आया और उसी मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करना उनके लिए बेहद भारी पड़ गया।

बताया जा रहा है कि जैसे ही पीड़ित ने मैसेज में दिए गए लिंक को खोला, उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद कुछ ही समय में उनके बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 2 लाख 85 हजार रुपये निकाल लिए गए। इस घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अब साइबर सेल इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

ओवरस्पीड चालान के नाम पर हुआ साइबर फ्रॉड

आजकल साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ओवरस्पीड चालान के नाम पर होने वाला यह साइबर फ्रॉड भी उसी तरह की एक चालाक साजिश का हिस्सा है। ठग लोगों को ऐसा मैसेज भेजते हैं जो बिल्कुल असली सरकारी मैसेज जैसा दिखाई देता है।

इस मामले में भी पीड़ित रेलवे कर्मचारी विवेक शुक्ला को 17 मार्च को एक मैसेज मिला। मैसेज में लिखा था कि उनकी गाड़ी का ओवरस्पीड चालान काटा गया है और जुर्माना भरने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा। मैसेज इतना असली लग रहा था कि उन्हें शक नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, ठगों ने उनके मोबाइल पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

लिंक पर क्लिक करते ही हैक हुआ मोबाइल

साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लिंक भेजते हैं जिनमें छिपा हुआ मैलवेयर या हैकिंग कोड होता है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक को खोलता है, उसका मोबाइल या डिवाइस हैक हो सकता है।

विवेक शुक्ला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। लिंक पर क्लिक करने के बाद उनके मोबाइल फोन की सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई और ठगों को उनके फोन तक पहुंच मिल गई।

इसके बाद ठगों ने बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का फायदा उठाया और उनके खाते से चार किस्तों में कुल 2 लाख 85 हजार रुपये निकाल लिए। जब तक उन्हें इस ठगी का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

चार किस्तों में खाते से निकाले पैसे

पीड़ित को पहले तो समझ ही नहीं आया कि आखिर क्या हो रहा है। लेकिन कुछ ही समय बाद उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने के मैसेज आने लगे। ठगों ने उनके खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे निकाले। कुल मिलाकर 2 लाख 85 हजार रुपये खाते से निकाल लिए गए। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से हुई कि पीड़ित को तुरंत कुछ समझ नहीं आया। बाद में जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो ठगी का पता चला।

पुलिस ने शुरू की जांच

इस घटना के बाद पीड़ित विवेक शुक्ला ने बिलासपुर के तोरवा थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की टीम अब इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ठगों के डिजिटल फुटप्रिंट और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह मैसेज किस नंबर से भेजा गया था और लिंक किस सर्वर से जुड़ा हुआ था।

साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामले

पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। साइबर अपराधी लोगों को फर्जी मैसेज, कॉल या लिंक के जरिए फंसाने की कोशिश करते हैं। कभी केवाईसी अपडेट करने के नाम पर, कभी बैंक अकाउंट ब्लॉक होने के डर से और कभी चालान या सरकारी नोटिस के नाम पर लोगों को झांसे में लिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में हर व्यक्ति को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक होना बेहद जरूरी है।

ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करनी चाहिए। अगर कोई मैसेज किसी सरकारी विभाग के नाम से आता है तो उसकी पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट से करनी चाहिए। इसके अलावा अपने मोबाइल फोन में सुरक्षा अपडेट और एंटीवायरस का उपयोग करना भी जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को इस तरह का संदिग्ध मैसेज मिलता है तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और बिना सोचे-समझे उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए।

डिजिटल जागरूकता की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए कितने चालाक तरीके अपनाते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग डिजिटल दुनिया में सतर्क रहें। सरकारी एजेंसियां और पुलिस भी लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। अगर लोग थोड़ा सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें तो इस तरह की साइबर ठगी से काफी हद तक बचा जा सकता है।