छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा विधायक ईश्वर साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बैज ने दावा किया कि साजा विधानसभा से विधायक ईश्वर साहू ने अपने स्वेच्छानुदान फंड का बड़ा हिस्सा अपने, पीएसओ और पीए के रिश्तेदारों को बांट दिया।
बैज ने तंज कसते हुए कहा,
“स्वेच्छानुदान की राशि जरूरतमंदों की मदद के लिए होती है। लेकिन विधायक जी तो ‘माले मुफ्त दिले बेरहम’ वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं।”
रिश्तेदारों को बांटी गई रकम का आरोप
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में एक सूची जारी की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि विधायक साहू ने करीब 20 से अधिक नजदीकी लोगों को 20 से 40 हजार रुपये तक की राशि दे दी। लिस्ट में भाई, मामा, चाचा जैसे संबंधियों के नाम शामिल हैं। कांग्रेस का दावा है कि सुरक्षा में लगे पीएसओ ओम साहू के परिजनों को भी इस राशि का फायदा मिला। पोस्ट में लिखा गया,
“चिलम-तंबाकू का डब्बा खोजने में व्यस्त विधायक और उनके पीएसओ ने शासन की जरूरतमंदों के लिए तय रकम को अपनों में बांट लिया।”
कांग्रेस को हजम नहीं
इन आरोपों पर विधायक ईश्वर साहू ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सफाई दी। उन्होंने कहा,
“मैं गरीब परिवार से हूं, विधायक बन गया हूं, यही कांग्रेस को हजम नहीं हो रहा। जो भी जरूरतमंद आवेदन लेकर आया, उसे हमने सूची में जोड़ा। अब तक 2 हजार लोगों का नाम भेजा है, जिनमें 500-700 को राशि भी दी जा चुकी है।”
साहू ने कहा कि कांग्रेस झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करना चाहती है, जबकि उनके खुद के मंत्री और नेता जेल में हैं। दुर्ग जिले में दो ननों की गिरफ्तारी को लेकर भी कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा। दीपक बैज ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूडीएफ सांसदों को भरोसा दिलाया कि वे राज्य सरकार को कोर्ट में ननों की जमानत का विरोध न करने के निर्देश देंगे।
बैज ने सवाल उठाया,
“जब केरल भाजपा अध्यक्ष कह रहे हैं कि नन निर्दोष हैं, तो फिर गिरफ्तारी क्यों हुई? इसका मतलब साफ है कि राज्य सरकार ने बजरंग दल के दबाव में गिरफ्तारी की।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बजरंग दल अब अल्पसंख्यकों के लिए आतंक का पर्याय बन गया है। मुसलमानों के बाद अब ईसाई, सिख और अन्य समुदाय भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दीपक बैज ने कहा कि भाजपा ने चुनाव के दौरान मितानिनों से नियमित वेतन और स्थायीकरण का वादा किया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं तहसीलदारों की हड़ताल पर बैज बोले,
“तहसीलदारों ने नारियल तक चढ़ा दिया, फिर भी सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। इससे पूरे प्रदेश में राजस्व कामकाज ठप पड़ा है।”
कौन हैं ईश्वर साहू?
ईश्वर साहू का नाम बिरनपुर सांप्रदायिक हिंसा के बाद सुर्खियों में आया था, जिसमें उनके बेटे की मौत हो गई थी। उसी घटना के बाद बीजेपी ने उन्हें 2023 विधानसभा चुनाव में टिकट दिया। उन्होंने कांग्रेस के सीनियर नेता और सात बार के विधायक रविंद्र चौबे को हराकर साजा सीट जीती थी।







