माओवादियों ने की सशस्त्र संघर्ष पर अस्थायी रोक की घोषणा, सरकार से मांगा एक महीने का युद्धविराम

माओवादियों ने केंद्र सरकार के साथ सीधी वार्ता की पेशकश की है और कहा है कि वे गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के लिए तैयार हैं।
माओवादियों ने की सशस्त्र संघर्ष पर अस्थायी रोक की घोषणा, सरकार से मांगा एक महीने का युद्धविराम

प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) ने अपने बयान में सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है और शांति वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से एक महीने का युद्धविराम घोषित करने की मांग की है। माओवादियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह अपनी प्रतिक्रिया इंटरनेट और सरकारी समाचार माध्यमों, जैसे रेडियो, के जरिए साझा करे। यह बयान मंगलवार को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसकी प्रामाणिकता की जांच छत्तीसगढ़ सरकार कर रही है।

माओवादियों का यह बयान 15 अगस्त को केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय के नाम से जारी हुआ, जो छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की मौत के चार महीने बाद आया है। बयान में कहा गया है कि बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य व प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील के मद्देनजर, माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।

सीधी वार्ता की पेशकश

माओवादियों ने केंद्र सरकार के साथ सीधी वार्ता की पेशकश की है और कहा है कि वे गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार से एक महीने का समय मांगा है ताकि वे अपने विभिन्न राज्यों में कार्यरत और जेल में बंद साथियों से परामर्श कर सकें। इसके साथ ही, उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए विचार-विमर्श की पेशकश की और सरकार से तत्काल एक महीने का औपचारिक युद्धविराम घोषित करने की मांग की ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

बयान की प्रामाणिकता की जांच

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बयान की प्रामाणिकता की जांच की बात कही और युद्धविराम शब्द को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि कोई युद्ध जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि माओवादियों के लिए सबसे अच्छा रास्ता आत्मसमर्पण और पुनर्वास लाभ लेना है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि बयान की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है और इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय सरकार द्वारा स्थिति के आकलन के बाद लिया जाएगा।

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