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MP-छत्तीसगढ़ का बढ़ा मान! 7 हस्तियों को पद्मश्री, आदिवासी सेवा से जल संरक्षण तक मिला सम्मान

Written by:Bhawna Choubey
Published:
राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की 7 हस्तियों को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। साहित्य, समाज सेवा, पुरातत्व और जनजातीय उत्थान में योगदान देने वाले इन लोगों की कहानी प्रेरणा से भरी है।
MP-छत्तीसगढ़ का बढ़ा मान! 7 हस्तियों को पद्मश्री, आदिवासी सेवा से जल संरक्षण तक मिला सम्मान

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार इस बार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए खास बन गए हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित वर्ष 2026 के पहले नागरिक अलंकरण समारोह में इन दोनों राज्यों की 7 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इन लोगों ने वर्षों तक समाज, शिक्षा, जल संरक्षण, आदिवासी सेवा और संस्कृति के क्षेत्र में ऐसा काम किया, जिसने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई।

इन नामों में कोई बड़े फिल्म स्टार या उद्योगपति नहीं हैं, बल्कि ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने जमीन पर रहकर समाज के लिए काम किया। किसी ने गांवों में पानी बचाने का अभियान चलाया, तो किसी ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं। अब उनके इसी योगदान को देश का सर्वोच्च सम्मान मिल रहा है।

राष्ट्रपति भवन में होगा भव्य पद्म पुरस्कार समारोह

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित समारोह में देश की 66 विभूतियों को सम्मानित करेंगी। इस समारोह में 2 लोगों को पद्म विभूषण, 6 हस्तियों को पद्म भूषण और 58 लोगों को पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा।

पद्म पुरस्कार देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। इस बार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई हस्तियों के नाम सामने आने से दोनों राज्यों में खुशी का माहौल है।

भोपाल के कैलाश चंद्र पंत को मिलेगा पद्मश्री

भोपाल निवासी कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा। युवावस्था से ही वे समाज सुधार और पत्रकारिता से जुड़े रहे। उन्होंने अपने लेखन और विचारों के जरिए समाज में जागरूकता फैलाने का काम किया।

कैलाश चंद्र पंत ने शिक्षा और साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लंबे समय तक काम किया। उनके लेख और सामाजिक विचारों ने कई युवाओं को प्रेरित किया। भोपाल में उनके सम्मान की खबर सामने आने के बाद साहित्य जगत में खुशी का माहौल है।

‘बैतूल के जल पुरुष’ मोहन नागर को मिला सम्मान

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोहन नागर को लोग “वॉटर मैन ऑफ बैतूल” के नाम से जानते हैं। उन्हें जल संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए काम के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा।

मोहन नागर ने गांव-गांव जाकर लोगों को वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और पानी बचाने के लिए जागरूक किया। उन्होंने “गंगा अवतरण अभियान” जैसी पहल के जरिए आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाया। आज जब देश में पानी की समस्या बढ़ रही है, ऐसे समय में उनका काम लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

पुरातत्व के क्षेत्र में डॉ. नारायण व्यास का बड़ा योगदान

डॉ. नारायण व्यास को पुरातत्व के क्षेत्र में लंबे समय तक किए गए कार्यों के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने करीब चार दशकों तक ऐतिहासिक स्थलों की खोज, खुदाई और संरक्षण का काम किया।

इतिहास और पुरातत्व के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। कई महत्वपूर्ण प्राचीन स्थलों को पहचान दिलाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनका काम आने वाली पीढ़ियों को भारत के इतिहास को समझने में मदद करेगा।

बुंदेली युद्ध कला को बचाने वाले भगवानदास रायकवार

सागर के ऐतिहासिक छत्रसाल बुंदेला अखाड़े से जुड़े भगवानदास रायकवार को भी पद्मश्री सम्मान मिलेगा। उन्होंने बुंदेली युद्ध कला की उस परंपरा को फिर से जीवित किया, जो धीरे-धीरे खत्म होती जा रही थी।

भगवानदास रायकवार ने खुद इस कला का अभ्यास किया और युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया। उनके प्रयासों से बुंदेलखंड की पारंपरिक युद्ध कला को नई पहचान मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ कला को नहीं बचाया, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का भी काम किया।

छत्तीसगढ़ के गोड़बोले दंपति को भी पद्मश्री

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पिछले 35 वर्षों से जनजातीय लोगों की सेवा कर रहे गोड़बोले दंपति को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। वे वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। दूर-दराज के गांवों में जहां अस्पताल और डॉक्टरों की कमी है, वहां गोड़बोले दंपति ने लोगों के इलाज और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए लगातार काम किया। उनकी सेवा को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

बुधरी ताती का संघर्ष भी बना मिसाल

दंतेवाड़ा जिले की बुधरी ताती को महिला उत्थान और समाज सेवा के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा। वे साल 1984 से बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में काम कर रही हैं। उन्होंने आदिवासी महिलाओं को जागरूक करने, नशामुक्ति अभियान चलाने और साक्षरता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। बुधरी ताती का कहना है कि समाज सेवा ही उनके जीवन का उद्देश्य रहा है। उनके काम से हजारों महिलाओं और परिवारों को फायदा मिला।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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