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‘माओवाद का रास्ता छोड़ा और सरेंडर करने लगे नक्सली’, सीएम विष्णुदेव साय ने साझा की पूरी रिपोर्ट

Written by:Saurabh Singh
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सरकार के कार्यकाल में अब तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाता है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने और आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन देने का लक्ष्य रखा है।
‘माओवाद का रास्ता छोड़ा और सरेंडर करने लगे नक्सली’, सीएम विष्णुदेव साय ने साझा की पूरी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्लानार योजना ने नक्सलियों में विश्वास जगाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू इन योजनाओं के कारण माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। नारायणपुर जिले में माड़ बचाओ अभियान के तहत सुरक्षाबलों के निरंतर प्रयासों से 12 नक्सलियों, जिनमें दो एरिया कमेटी सदस्य शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण किया है। इन नक्सलियों पर 50 हजार से लेकर 5 लाख तक का इनाम था।

आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन के लिए 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है और उन्हें पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। सरकार के कार्यकाल में अब तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाता है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने और आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन देने का लक्ष्य रखा है।

नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाएं

नई पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को आवास, ब्याज मुक्त ऋण, मासिक गुजारा भत्ता और गोला-बारूद समर्पण के लिए प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर के नक्सल प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिसके लिए 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी आवंटित किया गया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 14 नए सुरक्षा कैंप

नियद नेल्लानार, जिसका अर्थ है ‘आपका अच्छा गांव’, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 14 नए सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में 25 से अधिक सुविधाएं प्रदान कर रही है। इनमें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम आवास योजना जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यह योजना न केवल सुविधाएं प्रदान कर रही है, बल्कि आदिवासी गांवों में आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई शुरुआत कर रही है।