मक्के के खेत में लहलहा रही थी गांजे की खेती, आरोपी गिरफ्तार

मक्के के खेत में लहलहा रही थी गांजे की खेती, आरोपी गिरफ्तार

छिंदवाड़ा, विनय जोशी| परासिया और न्यूटन पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए लगभग 11 लाख रुपये का गांजा के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया। अपने खेत मे मक्का के साथ गांजा की खेती करने बाले आरोपी पर .पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 41/ 2020 धारा 8, 20(ए) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला बनाया।

जिला पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल के नेतृत्व में अवैध मादक पदार्थ पदार्थों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान के तहत परासिया और न्यूटन पुलिस ने 11लाख 62हजार कीमत का 2 किवंटल 12 किलो 580 ग्राम गांजा जप्त किया है| अनुविभागीय पुलिस अधिकारी अनिल शुक्ला ने बताया कि आरोपी हंसलाल पिता प्रेमलाल बेलवंशी निवासी कोनडरा बुदला ने मक्के के खेत के बीच में गांजा की खेती कर रहा था .पुलिस को मुखबिर से मिली सूचना के अनुसार जब पुलिस ने मौके पर दबिश दी, तो पुलिस को आरोपी के खेत में गांजा की खेती फसल लह-लाहती हुई मिली|

पुलिस ने मौके से गांजे के 1573 पेड़ जिनकी लंबाई लगभग 3 फीट से लेकर 10 फीट थी, को जप्त कर उनका वजन किया तो कुल पेड़ का वजन 2 किवंटल 12 किलो 580 ग्राम पाया गया .पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 41/ 2020 धारा 8, 20(ए) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रेस को जानकारी तो पूरी दी गई पर जप्त गांजा को दिखाने से न नुकुर करती रही। जो जानकारी पुलिस ने दी उस पर संदेह होना जायज है कि कहीं ज्यादा माल तो नही है बार बार पत्रकारों ने देखने को कहा तो उन्हें बोला गया कि माल स्टाक रूम में रख दिया है जो भी हो पुलिस की इस कार्यवाही से गांजा तस्करो की दिन ओर रात की नींद हराम हो गई । वही पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कृत करने की घोषणा की है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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