रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, जिम्मेदार अधिकारियों की मौन स्वीकृति से फल-फूल रहा रेत का अवैध कारोबार

रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, जिम्मेदार अधिकारियों की मौन स्वीकृति से फल-फूल रहा रेत का अवैध कारोबार

छिंदवाड़ा, विनय जोशी| प्रदेश में मुखिया अवैध कारोबारियों पर नकेल कसने लगातर कारवाही कर रहे है । वही कोयलांचल क्षेत्र परासिया (Parasia) में अवैध उत्खनन (Illegal Mining) रुकने का नाम नही ले रहा है| चाहे वह कोयला हो या रेत, प्रशासन को ठेंगा दिखाते माफिया दिन दहाड़े राजस्व को लाखों का चूना लगाने कोई कसर नही छोड़ते|

कोयलांचल की जीवन दायनी पेंच नदी का सीना छन्नी कर दिनरात माफिया रेत का अवैध कारोबार कर रहे है । प्रशासन की ऑनलाइन रॉयल्टी सुविधा को दरकिनार कर अवैध फर्जी पर्ची काटकर प्रतिदिन लाखो का कारोबार में जुटे रेतमाफियो को प्रशासन का कोई ख़ौफ़ नही होता| नदियों से रेत निकालने के बाद लेखा जोखा देखने वाले कर्मचारी फर्जी पर्ची काटकर टेक्टर ड्राइवर को पकड़ा देते है| वही फर्जी पर्ची को ड्राइवर रॉयल्टी पर्ची समझते है , एवं बेख़ौफ़ रेत का परिवहन पूरे क्षेत्र में करते है , रॉयल्टी की जानकारी लेने पर वाहन चालक बेख़ौफ़ फर्जी पर्ची दिखाते है|

चुकी खनिज से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियो का ठिकाना जिले में है , और कभी छलनी होती नदियों को देखने का उनके पास समय नही होता और न ही उनका ध्यान| कही न कही जिम्मेदार अधिकारियों की मौन स्वीकृति शामिल होने से नाकारा नही जा सकता । इसलिए धड़ल्ले से रेत माफिया रेत का अवैध परिवहन कर लाखो कमाने में सफल हो जाते है| परासिया एसडीएम महेश प्रजापति से जानकारी लेने पर उन्हीने कारवाही करने आश्वासन दिया है| लेकिन वह दिन कब आएगा जब प्रशासन की कारवाही होगी , तब तक रेत माफिया राजस्व को करोड़ो रुपये का चूना लगा चुके होंगे|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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