इस जिले की पुलिस आई सवालों के कटघरे में, 40 लोग पहुंचे पिकनिक मनाने, दो लोग डूबे

इस जिले की पुलिस आई सवालों के कटघरे में, 40 लोग पहुंचे पिकनिक मनाने, दो लोग डूबे

जबलपुर, संदीप कुमार

कोरोना वायरस का लॉक डाउन-ईद का पर्व-और पुलिस की चैकिंग पर सवाल, जी हां जबलपुर में लॉक डाउन के बाद भी एक साथ 40 लोगों का पिकनिक में जाना और उसी पिकनिक में नहाते वक्त दो युवकों का डूब जाना कहीं ना कहीं पुलिस की उस वाहन चेकिंग पर सवाल उठा रहा है, जो कि अधारताल से लेकर बरगी तक जाने वाले लोगों की चेकिंग में जुटी थी।

दरअसल ईद के पर्व के बाद आज अधारताल के कटरा में रहने वाले करीब 40 युवक एक साथ पिकनिक मनाने के लिए टेमर नदी पहुंचे थे। इस दौरान इन युवकों की रास्ते में कहीं भी चेकिंग नहीं हुई। पिकनिक मनाने गए इस ग्रुप में दो युवक आज शाम टेमर नदी में नहाते वक्त अचानक ही डूब गए। दोनों ही युवकों के डूबने के बाद दोस्तों में हड़कंप मच गया,  आनन-फानन में कुछ दोस्तों ने डूबे हुए युवकों की तलाश भी की पर नतीजा कुछ नहीं निकला। इधर बरगी थाना पुलिस को सूचना दी गई कि दो युवक टैमर नदी में डूब गए हैं, जिसके बाद पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे। करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भी डूबे हुए दोनों युवकों की जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाई है,  बहरहाल अंधेरा होने के चलते अब रेस्क्यू सुबह किया जाएगा।

कोरोना लॉक डाउन में पुलिस की बड़ी लापरवाही

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉक डाउन और उसमें एक साथ 40 लोगों का अधारताल से बरगी तक जाना पुलिस की चेकिंग में एक बड़ा सवाल उठा रहा है।कोरोना के कारण जहां लोग अपने घरों पर ही हैं और हर आम व्यक्ति को पुलिस बैरिकेड लगाकर रोक रही है। बावजूद इसके अधारताल के रहने वाले यह 40 युवक आखिर बरगी तक कैसे पहुंच गए सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या रास्ते में किसी भी पुलिसकर्मी उन्हें इन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाई। बहरहाल अब दोनों युवकों की तलाशी का दौर सुबह शुरू होगा।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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