डबरा: मध्य प्रदेश की डबरा नगर पालिका परिषद में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। परिषद के 19 पार्षदों ने अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे।
यह पूरा विवाद पार्षद जयेंद्र गुर्जर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सामने आया है। उनका दावा है कि नगर पालिका में साल 2022 से सुनियोजित तरीके से वित्तीय गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिससे राजकोष को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
संपत्ति कर में 5 से 6 करोड़ की हेराफेरी का आरोप
पार्षद जयेंद्र गुर्जर ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नगर पालिका में संपत्ति कर के रिकॉर्ड के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड में कई ऐसी संपत्तियों की टैक्स एंट्री को शून्य (‘0.00’) कर दिया गया है, जबकि नागरिकों ने अपना कर जमा किया था।
आरोपों के मुताबिक, कई मामलों में रसीद जारी होने की तारीख के बाद एक ‘डिलीशन तिथि’ भी दर्ज है, जिसके बाद जमा की गई राशि को शून्य दिखा दिया गया। गुर्जर का अनुमान है, “केवल एक वर्ष में इस तरह से हटाए गए कर की कुल राशि लगभग 5 से 6 करोड़ रुपये तक हो सकती है।”
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी उठे सवाल
वित्तीय अनियमितताओं के अलावा, पार्षदों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि योजना के तहत आवंटित करीब 600 आवासों में से लगभग 300 लाभार्थी कथित तौर पर सिर्फ अध्यक्ष के वार्ड से संबंधित हैं।
“यह भी दावा किया गया है कि कुछ लाभार्थियों के नाम ऐसे हैं जो उस वार्ड में रहते भी नहीं हैं, फिर भी उन्हें योजना का लाभ दे दिया गया, इनमें से कुछ अध्यक्ष के रिश्तेदार भी हैं।” — असंतुष्ट पार्षद
इसके अलावा, नगर पालिका की दैनिक आय में भारी गिरावट को लेकर भी चिंता जताई गई। गुर्जर के अनुसार, वर्ष 2022-23 में जहां दैनिक वसूली 17 से 18 हजार रुपये थी, वह अब घटकर मात्र 1000 से 1500 रुपये प्रतिदिन रह गई है। इससे सालाना 30 से 35 लाख रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है।
अधिकारियों पर धमकी देने का आरोप और इस्तीफे की चेतावनी
पार्षदों ने परिषद की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि परिषद की बैठकों में पारित कई नामांतरण प्रस्तावों पर अध्यक्ष ने हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे नागरिकों के काम रुके हुए हैं। इन मुद्दों को उठाने के लिए भी एक विशेष बैठक भी बुलाई गई थी।
जयेंद्र गुर्जर ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते हैं, तो अधिकारी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देते हैं। अंत में, 19 पार्षदों ने एकमत होकर चेतावनी दी है कि अगर इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर समाधान नहीं किया गया तो वे अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।






