
डबरा। शिक्षक दिवस पर जहां शिक्षकों के सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं डबरा के शासकीय विद्यालयों में कई शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध जताते नजर आए। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए TET परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया और शिक्षक दिवस पर किसी भी तरह का सम्मान लेने से इनकार कर दिया।
शिक्षकों का कहना है कि शिक्षक दिवस उनके लिए सम्मान और गौरव का दिन है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था के कारण इसी दिन उन्हें विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि ऐसा सम्मान उन्हें स्वीकार नहीं है, जिससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती हो।
पुराने शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता का विरोध
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के मुताबिक वर्ष 1998 से 2011 के बीच अलग-अलग भर्ती नियमों के तहत नियुक्त शिक्षक वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। अब उन्हें TET में शामिल होकर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कहा जा रहा है और इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है।
शिक्षकों का सवाल है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बाद उनकी योग्यता को दोबारा पात्रता परीक्षा के जरिए साबित करने के लिए बाध्य करना कितना उचित है। इसी के विरोध में डबरा के अलग-अलग शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
बोले- TET की अनिवार्यता पर हो पुनर्विचार
शिक्षकों का कहना है कि यह मुद्दा केवल डबरा तक सीमित नहीं है और अन्य स्थानों पर भी शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए TET की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने तक वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे।
डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट
7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.
