प्रशासनिक मैनेजमेंट से जारी है अवैध रेत उत्खनन, टोकन-पर्ची से दौड़ रहे वाहन

प्रशासनिक मैनेजमेंट से जारी है अवैध रेत उत्खनन, टोकन-पर्ची से दौड़ रहे वाहन

डबरा, सलिल श्रीवास्तव। डबरा और भितरवार अनुविभाग में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन बड़े पैमाने पर जारी है। नदियों में आधा सैकड़ा के लगभग पनडुब्बियां डालकर उत्खनन किया जा रहा है, जिसके लिए रेत माफियाओं को रेत ठेकेदारों का पूरा संरक्षण और प्रशासनिक गारंटी प्राप्त है।

रेत ठेकेदारों का प्रशासनिक मैनेजमेंट ही है कि अवैध रूप से संचालित घाट जगह-जगह लगे नाके और उन पर बैठे बंदूकधारी पुलिस और राजस्व अमले को नहीं दिख रहे। कहने को जिला कप्तान अमित सांघी ने अवैध उत्खनन रोकने के लिए एक टीम बना दी है, पर यह टीम 2 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कर पाई है। और तो और, रेत माफिया रॉयल्टी की जगह टोकन जिसे एनआर कहा जाता है के माध्यम से ट्रैक्टर ट्रॉली और डंपर चलवा रहे हैं।

आपको बता दें कि ग्वालियर जिले में रेत का ठेका एमपी सेल्स के पास है। यह कंपनी ठेका लेने के बाद से ही विबादों में बनी रही। इसपर एनजीटी की रोक लगी और कंपनी ने बड़ी मुश्किल से भितरवार अनुविभाग में बसई और डबरा अनुविभाग में गजापुर घाट से डंप बेचने की परमिशन ली। अब एनजीटी की रोक भी हट चुकी है पर कंपनी ने अभी तक सभी घाट कागजों में चालू नहीं किये है, क्योंकि यदि वह सभी घाटों को चालू करेगी तो उन्हें राजस्व देना होगा या कहें अपनी किस्त जमा करनी होगी। और इसका सरल इलाज ढूंढते हुए कंपनी 2 घाटों की परमिशन के दम पर सारे घाट अवैध रूप से संचालित कर रही है।

अब बात करते हैं घाटों की तो डबरा में रायपुर चांदपुर, बैलगाड़ा, गजापुर, बाबूपुर, लिधौरा, कैथोदा, सिली, विर्राट और तो और बारकरी जिगनिया से भी अवैध उत्खनन जारी है।भितरवार में लोहारी पवाया अवैध उत्खनन का केंद्र बन चुके हैं। अगर बात करें थानों की तो अब कुछ थाने ऐसे हैं जिनके सामने से टोकन कहें या ठेकेदारों की प्रशासनिक गारंटी लेकर वाहन बेरोकटोक गुजरते हैं। डबरा का सिटी थाना, डबरा का देहात थाना ऐसे थाने हैं जहां से दिन रात ट्रैक्टर ट्रॉली निकलती हैं। सबसे बड़ी बात किसी भी ट्रैक्टर पर व्यापारिक उपयोग की अनुमति नहीं होती पर वह रेत का परिवहन धड़ल्ले से कर रहे हैं। इस बारे में अधिकारियों का सिर्फ एक ही जवाब होता है कि कार्यवाही करेंगे। पर कब यह बता पाना मुश्किल है।

फिलहाल पुलिस कप्तान अमित सांघी ने टीम बनाकर इशारा कर दिया है कि वह रेत ठेकेदारों के मैनेजमेंट का हिस्सा नहीं है। पर इतना जरूर है कि यदि पुलिस कप्तान मन बना लें तो टीम बनाने की जरूरत नहीं। थाना क्षेत्रों के थाना प्रभारी ही इस अवैध उत्खनन पर रोक लगा देंगे और किसी भी जगह अवैध उत्खनन नहीं होगा। अब देखना है कि पुलिस कप्तान कार्यवाही करवाते हैं या उनकी टीम भी दिखावा बनकर ही रह जाती है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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