आम लोगों को सरकारी दफ्तरों में आने के बाद अपने काम में कोई दिक्कत न हो इस बात पर सूबे की सरकार खास ध्यान दे रही है और अफसरों को खुद मुख्यमंत्री ने निर्देश भी दिए है लेकिन कई जगहों पर सीएम के निर्देश और आला अधिकारियों के आदेश बौने साबित हो रहे है। इसका ताजा उदाहरण दमोह कलेक्टर के अन्चक निरीक्षण में सामने आया।
सूबे के दमोह जिले में कुछ ऐसा ही चला रहा है जहां ब्लाक हेडक्वार्टर से लेकर डिस्ट्रिक हेडक्वार्टर तक सरकारी मुलाजिम मनमानी कर रहे हैं, जिले के कलेक्टर जहां भी औचक निरीक्षण कर रहे है वहां अधिकारी कर्मचारी अनुपस्थित मिल रह हैं। जिला मुख्यालय पर तो हद हो गई जब आफिस टाइम में एसडीएम आफिस, तहसीलदारों के दफ्तरों में ना तो साहब मिले न उनके कर्मचारी, अलबत्ता कार्यालय परिसर में सुबह से आए लोग भीषण गर्मी में जरूर पसीना बहाते नजर आए।
दफ्तरों में नहीं मिले एसडीएम, तहसीलदार, कर्मचारी
दरअसल शिकायतों के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दमोह के एसडीएम आफिस दो तहसीलों दमोह और दमयंतीनगर तहसील के साथ जनपद पंचायत ऑफिस में सरप्राइज विजिट की। ऑफिस टाइम शुरू होने के घंटों बाद तक जिम्मेदार एसडीएम, तहसीलदार नदारद थे तो कमरों में कर्मचारी भी नहीं थे। कलेक्टर ने एसडीएम और तहसीलदारों के फील्ड विजिट के बारे में मालूम किया तो वो फील्ड विजिट पर भी नहीं थे, डीएम प्रताप नारायण यादव ने मौके की हकीकत को कैमरे में कैद कराया और फिर जनपद आफिस का निरीक्षण किया तो यहां भी हालात ऐसे ही थे।
24 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
कलेक्टर ने तमाम पहलुओं को देखकर एसडीएम, दो तहसीलदारों सहित 24 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए है और उनसे 3 दिन में जवाब मांगा है वहीं इन लोगों का वेतन काटने के निर्देश भी दिए गए है। जिले में लंबे समय बाद किसी कलेक्टर ने एसडीएम और तहसीलदार लेवल के अफसरों को ऐसे नोटिस दिए हैं जिसके बाद से जिले में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा है कि जनता के लिए कहीं भी किसी भी तरह की कोई दिक्कत हुई हो मामला गड़बड़ हो जायेगा और सख्त कार्यवाही होगी जिसके लिए अफसर और मुलाजिम सभी तैयार रहें।






