
Congress MLA’s taunt on Siddharth Malaiya’s return in BJP : पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया के BJP में वापस आने के बाद भाजपा कार्यकर्ता खुशियाँ मना रहे हैं, पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके पुत्र सिद्धार्थ के समर्थक उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस इसे एक सामान्य बात मानते हुए तंज कस रही है कि पता नहीं क्या एग्रीमेंट हुआ है , क्या सेटलमेंट हुआ है? लेकिन कुछ भी हुआ हो कांग्रेस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
दमोह में सियासी हलचल तेज
दमोह की राजनीति में आज आये नए रूप के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, सूबे के पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ और उनके समर्थकों की फिर भाजपा में वापसी हुई है। भोपाल में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा, गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा सहित संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी में सिद्धार्थ मलैया की घर वापसी कराई गई तो इलाके के सियासी समीकरण भी बदलने वाले हैं।
कांग्रेस विधायक बोले – क्या एग्रीमेंट हुआ है ये उनसे ही पूछिए
इस बीच दमोह से कांग्रेस विधायक अजय टंडन का बड़ा बयान सामने आया है। मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि दर दर भटकने के बाद सिद्धार्थ फिर भाजपा में पहुंचे हैं, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा और सिद्धार्थ के बीच क्या सेटलमेंट हुआ है, क्या एग्रीमेंट हुआ है ये उनसे ही पूछना चाहिए।
अजय टंडन की जीत के बाद ही मलैया परिवार पर लगे थे आरोप
आपको बता दें कि अजय टंडन वही कांग्रेस नेता हैं जिनकी जीत के बाद सिद्धार्थ मलैया और पांच मंडल अध्यक्षों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया गया था, भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी ने आरोप लगाये थे कि मलैया परिवार और सिद्धार्थ ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर उन्हें हराने के लिए टंडन का साथ दिया था।
कांग्रेस विधायक टंडन बोले- उनकी पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा
कांग्रेस विधायक अजय टंडन ने साफ कहा कि उनकी जीत जनता का विश्वास थी इसमें किसी का कोई लेना देना नहीं है। सिद्धार्थ मलैया और उनके समर्थकों की वापसी के बाद टंडन मानते हैं कि इससे कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ेगा । उन्होंने कहा कि भाजपा बिखर चुकी है, जितने नेता उतनी भाजपा। इसलिए जनता का विश्वास कांग्रेस के साथ था और आगे भी रहेगा।
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दमोह से दिनेश अग्रवाल की रिपोर्ट
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

