भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई के बावजूद, सरकारी महकमों में घूसखोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश में एक बार फिर लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वतखोर सरकारी कर्मचारी को रंगे हाथ धर दबोचा है, जिसने प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना में भी अपने निजी स्वार्थ साधने का प्रयास किया। यह घटना दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत परासई गांव की है, जहां एक ग्राम रोजगार सहायक को आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। लोकायुक्त सागर की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए रोजगार सहायक राजेश लोधी को परासई ग्राम पंचायत भवन में ही दबोचा।
दरअसल, राजेश लोधी पर आरोप है कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों के निर्माण कार्य की जियो टैगिंग के लिए फरियादी संजू रैकवार से लगातार पैसों की मांग कर रहा था। जियो टैगिंग, निर्माण कार्य की प्रगति को दर्शाने वाली तस्वीरों को पोर्टल पर अपलोड करने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके आधार पर हितग्राही को अगली किश्त जारी की जाती है। इसी प्रक्रिया का लाभ उठाकर रोजगार सहायक राजेश लोधी ने संजू रैकवार को आर्थिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया था। गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बनाई गई इस योजना में भी भ्रष्टाचार का यह खेल खुलेआम चल रहा था, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा था।
PM आवास की तीसरी किश्त के लिए जियो टैगिंग के नाम पर मांगी घूस
पीड़ित संजू रैकवार ने लोकायुक्त पुलिस को बताया कि यह कोई पहली बार नहीं था जब राजेश लोधी ने उससे रिश्वत की मांग की हो। इससे पहले भी वह दो किश्तों में उससे कुल ग्यारह हजार रुपये ऐंठ चुका था। पहली बार में पांच हजार रुपये और दूसरी बार में छह हजार रुपये की रिश्वत राजेश लोधी ने संजू से ली थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत संजू रैकवार का घर स्वीकृत हुआ था और उसका निर्माण कार्य प्रगति पर था। तीसरी किश्त जारी कराने के लिए जियो टैगिंग की प्रक्रिया होनी थी, और इसी के एवज में रोजगार सहायक राजेश लोधी ने संजू रैकवार से आठ हजार रुपये की और मांग की। यह लगातार बढ़ती मांग फरियादी के लिए असहनीय हो चुकी थी।
रिश्वत से परेशान हितग्राही ने लोकायुक्त से लगाई गुहार
रोजगार सहायक की लगातार पैसों की मांग और उसके मनमाने रवैये से परेशान होकर संजू रैकवार ने आखिरकार लोकायुक्त सागर में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। संजू ने अपनी शिकायत में राजेश लोधी द्वारा की जा रही रिश्वत की मांग और पूर्व में ली गई रकम का पूरा ब्योरा दिया। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की गंभीरता को समझते हुए तत्काल मामले का सत्यापन किया। जब सत्यापन में शिकायत सही पाई गई, तो लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। यह प्रक्रिया पूरी गोपनीयता और सावधानी से की गई, ताकि आरोपी को भनक न लगे और वह अपने मंसूबों में कामयाब न हो सके।
लोकायुक्त ने रोजगार सहायक को रंगे हाथ पकड़ा
योजना के तहत, आज लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जाल बिछाया। फरियादी संजू रैकवार तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार, परासई ग्राम पंचायत भवन में रोजगार सहायक राजेश लोधी को आठ हजार रुपये देने पहुंचा। जैसे ही राजेश लोधी ने संजू से रिश्वत की रकम ली, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। पुलिसकर्मियों ने राजेश लोधी को रंगे हाथ पकड़कर उसके हाथों को धुलवाया, जिससे रिश्वत के पैसों का रंग साफ तौर पर देखा जा सका। इस कार्रवाई से पंचायत भवन में हड़कंप मच गया और अन्य कर्मचारी भी सकते में आ गए। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर चोट की है।
रोजगार सहायक के खिलाफ मामला दर्ज
गिरफ्तारी के बाद, रोजगार सहायक राजेश लोधी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त सागर के डीएसपी कमल सिंह ऊईके ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि रोजगार सहायक को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेगी और किसी भी सरकारी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा जो जनता के काम के बदले घूस मांगेगा। फरियादी संजू रैकवार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह इस लगातार हो रही पैसों की मांग से बेहद परेशान था और न्याय मिलने से उसे राहत मिली है।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार किस कदर अपनी जड़ें जमा चुका है। प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाएं, जिनका उद्देश्य गरीबों को छत प्रदान करना है, ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों के कारण बाधित होती हैं। लोकायुक्त की यह कार्रवाई भले ही एक व्यक्तिगत मामले में हो, लेकिन यह एक बड़ा संदेश देती है कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्रवाइयां नितांत आवश्यक हैं। उम्मीद की जाती है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी सबक मिलेगा और वे घूसखोरी की इस आदत को त्यागने पर मजबूर होंगे। लोकायुक्त पुलिस अपनी सतर्कता और सक्रियता से लगातार ऐसे मामलों पर नकेल कस रही है, ताकि आम जनता को बिना किसी परेशानी के सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। लोकायुक्त एसपी कार्यालय ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।





