मध्य प्रदेश के दमोह जिले से बड़ी खबर सामने आई है। जहां रनेह पुलिस थाने से फरार हुआ फर्जी डॉक्टर एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। दरअसल, 6 जुलाई को वह पुलिस हिरासत से रनेह थाने से फरार हो गया था। फरारी के बाद पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी। अब पुलिस ने उस फर्जी डॉक्टर को फिर से गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें कि इस फर्जी डॉक्टर लीलाधर चौधरी पर एक नाबालिग लड़की के गलत इलाज करने से मौत का आरोप है। जिसके बाद लड़की के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया। 23 मई को पुलिस ने उसे हटा कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।
पुलिस की गिरफ्त से कैसे भागा आरोपी?
अब सवाल उठता है कि आखिर पुलिस की गिरफ्त से आरोपी कैसे फरार हुआ? बता दें कि पुलिस को आरोपी डॉक्टर से कुछ जानकारी एकत्रित करनी थी। जिसके लिए रनेह थाना पुलिस ने हटा कोर्ट में आवेदन दिया और उसके बाद पुलिस ने आरोपी को रिमांड पर ले लिया। जब पुलिस आरोपी से थाने में पूछताछ कर रही थी तब वह मौका देखकर थाने से फरार हो गया। इस घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
पुलिस ने दोबारा आरोपी को किया गिरफ्तार
आरोपी फरार होने के बाद पूरे मामले की कमान दमोह पुलिस अधीक्षक (SP) आनंद कलादगी ने स्वयं संभाली। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। पुलिस ने आरोपी को गांव हारट के पास से गिरफ्तार कर लिया। ऐसी जानकारी है कि वह अपने एक परिचित से मिलने जा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया।
आरोपी पर एक और होगा मामला दर्ज
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने मीडिया से बातचीत कर बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है जिससे यह जानकारी मिल सके कि वह पुलिस की गिरफ्त से कैसे और किन परिस्थितियों में फरार हुआ। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ पुलिस हिरासत से फरार होने के मामले में एक और मामला दर्ज किया जाएगा।
तीन पुलिस कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
उन्होंने आगे बताया कि आरोपी के फरार होने के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही थाना प्रभारी और एक एएसआई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मामले की विभागीय जांच जारी है।
पटेरा में चल रही थी वर्षों से क्लिनिक
बता दें कि आरोपी डॉक्टर लीलाधर चौधरी की जिले की तहसील पटेरा में कई वर्षों के क्लिनिक चल रही थी। वह पटेरा के पास गांव बमनपुरा निवासी है। पटेरा के बीच बाजार में खुद ही इलाज और खुद ही दवाईंया भी वितरित करता था। जिसके लिए उसने दो दुकानें किराए पर ले रखीं थी। एक दुकान पर खुद की क्लिनिक और दूसरी दुकान में प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए इलेक्ट्रिकल्स का बोर्ड लगाकर दवाइयां बेचता था।





