मध्य प्रदेश में अब साइबर ठगों ने अपनी चाल बदल दी है। पहले जहां वे आम लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब सरकारी अधिकारियों के नाम का भी दुरुपयोग करने लगे हैं। दमोह में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिले के कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के नाम से किसी अज्ञात व्यक्ति ने फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बना ली है। इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और आम जनता के बीच हड़कंप मच गया है, और साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
जैसे ही कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को अपने नाम से बनी इस फर्जी फेसबुक आईडी की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल लोगों से सजग रहने की अपील जारी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से हिदायत दी है कि इस प्रकार की किसी भी फर्जी आईडी से किसी भी तरह का संबंध न रखा जाए। यह चेतावनी इस बात को रेखांकित करती है कि जालसाज किस तरह लोगों को धोखा देने के लिए विश्वसनीय चेहरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को भ्रमित कर उनसे व्यक्तिगत जानकारी या धन ऐंठना होता है, जिससे वे अनजाने में बड़े नुकसान का शिकार हो सकते हैं।
कलेक्टर कार्यालय ने जारी की जनहित सूचना
कलेक्टर कार्यालय के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से भी एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया गया है। इस पोस्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के नाम से सोशल मीडिया पर एक फर्जी (Fake) फेसबुक आईडी बनाई गई है। आमजन से विशेष रूप से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी किसी भी आईडी से प्राप्त होने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। साथ ही, ऐसे किसी भी मैसेज या अन्य संवाद का जवाब बिल्कुल न दें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्थिति में ऐसी फर्जी आईडी के साथ किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न की जाए, क्योंकि ऐसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
यह चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर जालसाज ऐसी फर्जी आईडी के जरिए लोगों से पैसे ऐंठने, व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने या उन्हें किसी और धोखाधड़ी का शिकार बनाने की कोशिश करते हैं। वे अक्सर आपातकाल का बहाना बनाकर या किसी सरकारी योजना का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं। इसलिए, किसी भी प्रकार के संदिग्ध अनुरोध या मैसेज पर आंख मूंदकर भरोसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, और इससे बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
केवल आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही लें कलेक्टर की जानकारी
कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टर की सभी आधिकारिक जानकारी और अपडेट केवल Collector Office Damoh के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही प्राप्त किए जाने चाहिए। यह सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे केवल सत्यापित स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें और किसी भी अनाधिकारिक या संदिग्ध आईडी पर विश्वास न करें। साइबर अपराधों से बचने के लिए यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गलत सूचना और धोखाधड़ी से बचा जा सके।
प्रशासन ने आम जनता से खास अपील
प्रशासन ने आम जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध फर्जी आईडी से सावधान रहें और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। यदि किसी व्यक्ति को ऐसी कोई फर्जी आईडी दिखती है या उससे कोई संदिग्ध संदेश प्राप्त होता है, तो उन्हें तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को देनी चाहिए। ऐसा करके वे न केवल खुद को बल्कि अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार होने से बचा सकते हैं। इस प्रकार के मामलों में त्वरित कार्रवाई से जालसाजों को पकड़ने में मदद मिलती है और साइबर क्राइम पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता कितनी आवश्यक है। सोशल मीडिया का उपयोग करते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी अप्रत्याशित या अजीब अनुरोध पर संदेह करना चाहिए। अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग करके ठगी करने वाले ये अपराधी समाज के लिए एक गंभीर खतरा हैं, और उनसे बचने का एकमात्र तरीका निरंतर जागरूकता और सावधानी है।





