आग लगने से किसानों की मेहनत पल भर में स्वाहा, लाखों का नुकसान

आग लगने से किसानों की मेहनत पल भर में स्वाहा, लाखों का नुकसान

दमोह| गणेश अग्रवाल| दमोह जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले सरखड़ी ग्राम में अज्ञात कारणों से खेतों में आग लग गई| जिस कारण से कई किसानों को लाखों का नुकसान हो गया| कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया गया| लेकिन तब तक फसल पूरी तरह खाक हो गई|

मामले के मुताबिक दमोह सागर रोड पर स्थित ग्राम सरखड़ी में अज्ञात कारणों के चलते पहले एक खेत में आग लगी| वहीं हवाओं के कारण आग फैलती चली गई| पूरे गांव में एकत्रित होकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया| लोगों ने ट्रैक्टरों के माध्यम से फसलों की आग को बांटने का भी प्रयास किया लेकिन तेज हवाओं ने आग में घी डालने का काम करते हुए करीब 20 एकड़ की खेती को पूरी तरह से खाक कर दिया|

तत्काल नहीं मिली मदद, किसानों की मेहनत ख़ाक
ग्रामीणों की सूचना के बाद पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया| लेकिन तब तक किसानों की फसलों का नुकसान हो चुका था| स्थानीय लोगों ने बताया कि कई किसानों की लाखों की फसल का नुकसान हो गया है| जिसमें खेत में खड़ी फसल के साथ कटी हुई फसल का भी नुकसान हुआ है| ऐसे हालात में जब लॉक डाउन के चलते किसान भी घरों में बंद है| ऐसे में आग लगने के कारण तत्काल ही सहायता नहीं मिल सकी| जिससे आग अनेक किसानों की साल भर की मेहनत को नष्ट कर गई| मौके पर पुलिस विभाग के साथ प्रशासन ने पहुंचकर मामले की जांच शुरू की है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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