…जब अचानक बीच बाजार बग्गी लेकर भाग पड़ा घोड़ा, मच गई अफरातफरी, टल गया बड़ा हादसा…

दमोह में बीती रात एक बग्गी बिना सवार भाग रही थी उसे घोड़ा लेकर भाग रहा था लोगों के बीच अफरातफरी मच गई, लोग किसी बड़े हादसे की आशंका से बचते नजर आये...
Horse ran away with buggy, Damoh

दमोह में बीती रात एक बड़ा हादसा टल गया जब बीच सड़क एक बग्गी में बंधे घोड़े ने अफरातफरी फैला दी, सड़क पर चल रहे लोग जान बचाते भागते दिखाई दिए और शुक्र रहा कि घोड़े के इस कारनामे से कोई बड़ी घटना नहीं हो पाई लेकिन एक पुलिस का सीसीटीवी टावर जरूर क्षतिग्रस्त हो गया।

दरअसल रात के वक्त रोजाना की तरह दमोह के कोआपरेटिव बैंक चौराहे से बस स्टैंड आने वाली सड़क पर लोगों की आवाजाही हो रही थी कि अचानक एक तेज रफ्तार घोड़ा बग्गी दौड़ती दिखाई दी तो लोग सतर्क हुए लोगों को बग्गी चलाने वाले पर गुस्सा भी आया लेकिन जब देखा तो बग्गी पर कोई सवार नहीं था बल्कि घोड़ा खुद ही बग्गी को फसाए हुए भाग रहा था।

पुलिस के सीसीटीवी टावर से टकराई बग्गी गिरा

ये सब देखकर सड़क पर अफरातफरी का माहौल बन गया,लोग खुद को उससे बचाने लगे, घोड़ा तेज रफ़्तार से बागी लेकर भागा जा रहा था और लोग अपनी जान बचाते चल रहे थे तभी कुछ दूर जाकर एक ऑटो से बचकर निकलने के दौरान आखिरकार बस स्टैंड के पास घोड़ा पुलिस के सीसीटीवी टावर से टकराया और गिर गया जबकि उसकी बग्घी टावर में फंस गई।

घटना में घोड़ा और उसका मालिक चोटिल 

इस घटना में घोड़े को मामूली चोट आई है और बग्गी का भी नुकसान हुआ है वहीं सीसीटीवी टावर भी गिर गया। बग्गी मालिक के मुताबिक एक शादी समारोह में बारात निकलने के बाद वो बग्गी को लेकर घर जा रहा था और कुछ काम से बैंक चौराहे पर रुका लेकिन उसके जाते ही अचानक घोड़ा बग्गी को लेकर भाग निकला और ये समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस तरह से भीड़भाड़ वाले इलाके एक घोड़ा भाग रहा था उस से कोई बड़ी घटना हो सकती थी लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हो पाया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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