हैवानियत: मासूम का अपहरण कर दुष्कर्म, आंख फोड़ी, बोरे में बांध खेत में फेंका

हैवानियत: मासूम का अपहरण कर दुष्कर्म, आंख फोड़ी, बोरे में बांध खेत में फेंका

दमोह।मध्यप्रदेश के दमोह जिले में मनावता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।यहां कुछ बदमाशों ने एक 7 वर्षीय मासूम का अपहरण कर ना सिर्फ उसके साथ दुष्कर्म किया बल्कि उसकी एक आंख फोड़ने के बाद उसे हाथ पैर बांधकर बोरे में डालकर जंगल में फेंक दिया।जैसे ही स्थानीय लोगों को सुबह इसकी खबर लगी उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मासूम की हालात गंभीर बताई जा रही है, जिसे जबलपुर रैफर किया गया है।

घटना जबेरा थाना की है। बताया जा रहा है मासूम बुधवार शाम से ही लापता थी। बच्ची के दादा के मुताबिक दुकान से सामान लाने के लिए उन्होंने उसे 20 रुपए दिए थे, बच्ची सामान लाने गई लेकिन वो दरिंदगी का शिकार हो गई। बच्ची खेत में पड़ी मिली, उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे.. और आंख से खून रिस रहा था। गंभीर हालत में बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया है।  घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।स्थानीय लोग थाने का घेराव करने पहुंचे और थाने के बाहर लोगों का हंगामा जारी है। आरोपी के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं लग पाई है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द आरोपी को पकड़कर कठोर से कठोर सजा दी जाए। घटना के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात तो ये है कि लॉक डाउन के बीच जहां पुलिस चप्पे चप्पे पर तैनात है और आरोपियों ने इस घटना को अंजाम दे दिया।घटना के बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।पुलिस आरोपी का पता लगाने में जुटी है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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