मध्य प्रदेश में किसानों को खाद के लिए एक बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के दमोह जिले से आ रही तस्वीरें प्रदेशव्यापी खाद संकट की भयावहता को बयां कर रही हैं, जहाँ खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और किसान बेबसी में सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
दमोह जिले के खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और भीड़ बता रही है कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं। किसान देर रात से ही इन केंद्रों के बाहर जमा हो जाते हैं, सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं और अंत में अक्सर खाली हाथ ही लौटने को मजबूर होते हैं। यह सिलसिला अब रोजमर्रा की कहानी बन गया है, जिससे अन्नदाता का धैर्य टूट रहा है।
सरकार ने पुरानी व्यवस्था को किया बहाल
दरअसल, इस परेशानी की शुरुआत सरकार के उस निर्णय से हुई, जिसमें खाद वितरण के लिए ई-विकास पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। किसानों को टोकन तो मिल रहे थे, लेकिन उन्हें खाद फिर भी नहीं मिल पा रही थी। यह व्यवस्था भी किसानों की परेशानी कम करने में नाकाम साबित हुई। अब अचानक सरकार ने अपने नियम में संशोधन करते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया है। ऑनलाइन टोकन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और किसानों को सीधे केंद्र पर आकर कागज़ दिखाने, टोकन लेने और कतार में लगने का निर्देश दिया गया है।
कलेक्टर ने किसानों को बताया नया नियम
दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने किसानों को इस नए नियम से अवगत कराया कि अब ऑनलाइन टोकन की ज़रूरत नहीं, बल्कि सीधे केंद्र पर जाकर पुराने तरीके से टोकन लिया जा सकता है। यह घोषणा व्यवस्था को सुचारु करने की बजाय, उसे और जटिल कर गई। इस बदलाव ने हालात को और बिगाड़ दिया है। जहाँ पहले ई-टोकन के बावजूद खाद नहीं मिल रही थी, अब तो एक साथ हज़ार से दो हज़ार किसान एक-एक केंद्र पर पहुँच रहे हैं।
भगदड़ जैसे हालात में किसान परेशान
इन केंद्रों पर भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसी स्थिति है। किसान आपस में धक्का-मुक्की कर रहे हैं, अपनी बारी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चिपचिपी उमस और भीषण गर्मी में कई किसान चक्कर खाकर गिर रहे हैं, लेकिन इतनी मशक्कत के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। शनिवार तक जब ई-टोकन से खाद बांटी जा रही थी, तब भी किसानों को खाद नहीं मिल रही थी। अब जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में किसान पहुँच गए हैं, तो स्थिति का बिगड़ना स्वाभाविक था। किसानों के बीच खाद पाने की होड़ और अधिक बढ़ गई है, जिससे कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
दमोह जिले में बनाए गए तमाम खाद वितरण केंद्रों में एक जैसा ही आलम है। कहीं किसानों के बीच धक्का-मुक्की और टकराव हो रहा है, तो कहीं जिला मुख्यालय पर किसान अपनी हताशा व्यक्त करने के लिए चक्का जाम कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें खाद के बिना बर्बाद हो रही हैं और सरकार या प्रशासन उनकी समस्या पर गंभीर नहीं है। वहीं, तेंदूखेड़ा के तहसीलदार विवेक व्यास अब ‘कल से बेहतर व्यवस्था’ बनाने की बात कह रहे हैं, लेकिन वर्तमान में जो हालात हैं, वे किसानों की उम्मीदों को तोड़ रहे हैं।
खाद और यूरिया के पर्याप्त स्टॉक होने का दावा
बहरहाल, सरकार और प्रशासन लगातार खाद और यूरिया के पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन गोदामों में खाद का भरा रहना तब तक किसी काम का नहीं, जब तक वह सही समय पर किसानों के खेतों तक न पहुँच पाए। किसानों को इस बात से कोई मतलब नहीं कि खाद गोदामों में है या नहीं, उन्हें तो अपनी फसल बचाने के लिए खाद चाहिए। यदि खाद की कमी के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, तो इसका असर केवल उन पर ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यह संकट केवल वितरण का नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामी का है, जिसका खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है।





