मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर आई सामने, लोहे की जंजीरों में जकड़ा युवक लगा रहा गुहार, वीडियो वायरल

कुछ समझदार और मानवीयता वाले लोगों की नजर इस शख्स पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने व्यक्ति के पैरो में बंधी जंजीर ताला खोलकर निकाली और तब कहीं जाकर शख्स ने राहत की सांस की।
मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर आई सामने, लोहे की जंजीरों में जकड़ा युवक लगा रहा गुहार, वीडियो वायरल

एमपी के दमोह से हैरान करने और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है जहां एक व्यक्ति के पैरों में लोहे की जंजीरें बांध दी है और उस पर ताला लगा दिया गया और जंजीरों से जकड़ा शख्स सड़कों पर रेंगता रहा और कई घंटों बाद जब कुछ लोगों को दया आई तो उन्होंने पुलिस को इत्तिला दी और पुलिस ने व्यक्ति को जंजीरों से मुक्त कराया।

मामला दमोह जिले के मडियादो से सामने आया है यहां बस स्टैंड पर लोगों ने एक व्यक्ति को जंजीरों से जकड़ा हुआ देखा और लोग काफी समय तक तमाशबीन बने रहे लेकिन किसी ने उसकी जंजीरों को अलग करने की हिम्मत नहीं जुटाई, लोग वीडियो बनाते रहे और सोशल मीडिया पर वायरल करते रहे लेकिन कुछ समझदार और मानवीयता वाले लोगों की नजर इस शख्स पर पड़ी तो उन्होंने मडियादो पुलिस को सूचना दी जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने व्यक्ति के पैरो में बंधी जंजीर ताला खोलकर निकाली और तब कहीं जाकर शख्स ने राहत की सांस की।

पुलिस कर रही मामले की जाँच 

पुलिस ने जांच पड़ताल में पाया कि जंजीरों से जकड़ा शख्स पास के ही गांव विनती का हीरालाल प्रजापति है जिसके साथ ये कृत्य किया गया। सवाल यही की ये अमानवीय कृत्य किसने किया तो मडियादो पुलिस बुजुर्ग से पूछताछ करती रही लेकिन वो ये नहीं बता पाया कि उसके साथ ये सलूक किसने किया।

वीडियो में युवक परिजनों पर लगा रहा आरोप 

मडियादो थाना प्रभारी शिवांगी गर्ग के मुताबिक बुजुर्ग मानसिक रूप से कमजोर समझ में आ रहा है और बता पाने में सक्षम नहीं है लेकिन पुलिस जांच में जुटी है कि आखिर कौन है जिसने उसे जंजीरों में जकड़ा है। हालाँकि वीडियो में व्यक्ति बेटे द्वारा बांधे जाने और अन्य परिजनों पर प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहा है।

दमोह से दिनेश अग्रवाल की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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