पंचायत में पदस्थ सब इंजीनियर ने सरपंच से मांगी रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा, मामला दर्ज

शासकीय कार्य का मूल्यांकन करना उसके भुगतान के लिए बिल बनाना शासकीय काम होता है जिसके लिए सरकार से वेतन मिलता है लेकिन शासकीय सेवक इसके लिए भी रिश्वत की मांग करते हैं और फिर रंगे हाथ लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाते हैं । 
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रिश्वतखोरी पर लगातार हो रहे एक्शन के बाद भी शासकीय सेवक पैसे की डिमांड करने में जरा भी हिचकते नहीं हैं, ऐसे ही एक भ्रष्ट शासकीय सेवक ने सरपंच से रिश्वत की मांग की जिसे लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ  दबोच लिया, लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर जाँच में ले लिया है।

लोकायुक्त पुलिस सागर एसपी योगेश्वर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि एक सरपंच की शिकायत पर आज ट्रैप की कार्रवाई की गई जिसमें जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ सब इंजीनियर को ग्राम पंचायत के सरपंच से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है।

सब इंजीनियर ने सरपंच से मांगी रिश्वत 

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि दमोह जिले की ग्राम पंचायत बरमासा के सरपंच लीला गोंड ने एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ उपयंत्री राजेंद्र सिंह ठाकुर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

काम का मूल्यांकन करने और बिल बनाने के बदले मांगी रिश्वत 

आवेदक ने बताया कि  ग्राम पंचायत बरमासा जनपद पंचायत दमोह में किए गए पुलिया निर्माण एवं शाला बाउंड्री निर्माण कार्य आदि के मूल्यांकन करने एवं भुगतान हेतु बिल तैयार किए जाने के एवज उपयंत्री  राजेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा उनसे 20,000/-रुपए की रिश्वत की मांग की गई है।

रिश्वत हाथ में आते ही गिरफ्तार 

शिकायत मिलने के बाद एसपी के निर्देश पर इसकी सत्यता की जाँच की गई जिसमें सब इंजीनियर द्वारा 20,000/-रुपए की रिश्वत मांगी गई, प्रमाण मिलने के बाद ट्रैप प्लान की गई, आज मंगलवार को लोकायुक्त की टीम ने आवेदक के साथ ट्रैप के लिए गई और जैसे ही सरपंच ने सब इंजीनियर को रिश्वत की राशि 20,000/- रुपये दी उसे रंगे हाथ दबोच लिया। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज जाँच में ले लिया है।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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