योग दिवस :1 क्विंटल वजन के बाद भी पानी में फूल की तरह तैरता है यह पुलिसकर्मी

योग दिवस :1 क्विंटल वजन के बाद भी पानी में फूल की तरह तैरता है यह पुलिसकर्मी

दमोह। गणेश अग्रवाल।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) पर हम आपको एक ऐसे पुलिसकर्मी से मिलाना चाहते हैं जो पुलिसकर्मी करीब 15 सालों से लगातार जल में योग कर रहा है। लोग अक्सर कर जमीन पर ही योग करते हैं। सभी आसन करते हैं और स्वस्थ रहते हैं। लेकिन दमोह (Damoh) में रहने वाला यह पुलिसकर्मी और दमोह पुलिस का वीर जवान पानी में योग के आसन करता है। तो लोग दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं।

हम आपको बताते हैं क्या है इस पुलिसकर्मी का जल योग करने का कारण

दमोह जिले के बांदकपुर चौकी में पदस्थ हवलदार भगवानदास दहिया (Havildar Bhagwandas Dahiya posted at Bandakpur post) लगातार 15 वर्षों से जेल में योग की क्रियाएं कर रहा है, और इसका योग तब लोगों के सामने आया जब वर्तमान सरकार के द्वारा पूर्व के वर्षों में योग को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने के लिए बल दिया गया. जहां पर लोग जमीन पर योग की क्रियाएं करते हैं, वही यह पुलिसकर्मी पानी में योग की क्रियाएं करता है. पानी में उतरते ही यह पुलिसकर्मी भगवान का नाम लेने लगता है, और फूल की तरह पानी में तैरता रहता है. इस पुलिसकर्मी का कहना है कि उसका वजन करीब 100 किलो यानी 1 क्विंटल है. इसके बावजूद वह पानी में बिना किसी परेशानी के योग की क्रियाएं कर लेता है. इसने यह योग की क्रियाएं प्रयागराज उज्जैन कुंभ नर्मदा भेड़ाघाट सहित अनेक धार्मिक स्थलों पर भी की है. जहां पर उसे सराहना भी मिली है. तो पुलिसकर्मी को वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews