2 राज्यों की सीमा में फंसी दिहाड़ी मजदूरों की जान

2 राज्यों की सीमा में फंसी दिहाड़ी मजदूरों की जान

दतिया। सत्येन्द्र रावत।

वैश्विक स्तर पर फैली नोबेल कोरोनावायरस कोविड-19 के संक्रमण की महामारी भारत के कोने कोने में पहुंच गई है।जिसको लेकर कोविड-19 की प्रसार की रोकथाम के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता से 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था। जिसकी सफलता देख पूरे भारत में 14 अप्रैल तक लॉक डाउन करने की जनता से अपील की जिसमें यातायात के सभी संसाधनों को यथा स्थान रोक दिए गए वही दिल्ली नोएडा हरियाणा राजस्थान गुजरात आदि प्रांतों में फंसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दिहाड़ी मजदूरों के लिए दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया। जिसको लेकर मजदूरों ने लाखों की संख्या में अपने अपने घरों के लिए पलायन करना शुरू कर दिया। जब यह मजदूर विभिन्न प्रांतों और जिलों की सीमा से गुजरते हुए कोई पैदल कोई निजी वाहन से जिसको जो मिला वह चार सौ 500 किलोमीटर का सफर तय करके मध्य प्रदेश जिला दतिया और उत्तर प्रदेश की झांसी सीमा मजदूरों को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा रोक दिया गया। जब हजारों की संख्या में दिहाडी मजदूर एमपी यूपी बॉर्डर पर एकत्रित हो गए, तो दतिया पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई जिसको लेकर जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ से वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात का संज्ञान दिलाया कि जो मजदूर मध्य प्रदेश की सीमा में आ चुके हैं। वह आधे से ज्यादा उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं बाकी मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के मजदूर हैं लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक भी नहीं सुनी गई। जब इनके करतूतों की दतिया पुलिस ने वीडियोग्राफी करना शुरू कर दी तो उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने दतिया पुलिस के साथ तानाशाही करते हुए काफी लंबी नोकझोंक हो गई। जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दतिया पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार एवं गाली-गलौच का भी सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो मे स्पष्ट ऑडियो वीडियो के साथ वह दृश्य दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। जिसमें दतिया पुलिस को काफी मानसिक उत्पीड़न झेलनी पड़ी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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