श्री पीताम्बरा पीठ में 8 जून से होंगे दर्शन, पालन करनी होगी ये होगी गाइडलाइन

श्री पीताम्बरा पीठ में 8 जून से होंगे दर्शन, पालन करनी होगी ये होगी गाइडलाइन

दतिया/सत्येंद्र रावत

दतिया में श्री पीताम्बरा पीठ 8 जून से श्रद्धालुओं के लिये खोला जा रहा है। मंदिर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक दर्शन हेतु खोला जाएगा। 8 जून से 10 जून तक सिर्फ स्थानीय दर्शनार्थी ही दर्शन कर सकेंगे। स्थानीय दर्शनार्थियों के लिये 7 जून सुबह 9 बजे श्री पीताम्बरा पीठ आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंजीयन आरम्भ होगा पंजीयन व दर्शन के लिये परिचय पत्र (आधार कार्ड) लाना अनिवार्य होगा। दिनांक 11 जून 2020 से स्थानीय तथा बाहरी सभी श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग लिंक के माध्यम से पंजीयन कर दर्शन कर सकेंगे। लिंक की सूचना 10 जून को उपलब्ध कराई जाएगी।

दर्शन के लिये सरकारी गाइड लाइन के इन नियमों का पालन करना पड़ेगा –
1:-प्रवेश तथा निकास पीठ के उत्तर द्वार से होगा।
2:-मास्क पहनना अनिवार्य होगा
3:-सभी दर्शनार्थियों की थर्मल स्क्रीनिग होगी
4:-हाथ पैर धोकर ही मन्दिर में प्रवेश होगा
5:-जूते चप्पल स्वयं जूताघर में रखने होंगे
6:- कोई भी वस्तु फूल फल प्रसाद आदि मन्दिर में ले जाना वर्जित होगा
7:-दर्शन करते समय 6 फुट की दूरी रखनी होगी।
8:-मोबाइल बंद कर स्वयं की सुरक्षा में रखना होगा।
9:-श्री धूमावती माई के दर्शन बंद रहेंगे।
10:-अर्पित(लगा हुआ)प्रसाद ,प्रसाद काउंटर पर उपलब्ध रहेगा
11:-मन्दिर परिसर में थूकना तथा किसी भी मूर्ति ,वस्तु, रेलिंग को छूना मना है।
12:- आरोग्य सेतु एप्प का प्रयोग अनिवार्य रहेगा।
13:-मन्दिर पर दान आदि दान पेटी, चेक या ऑनलाइन स्वीकार्य है।
14:- चिकित्सीय टीम तथा एम्बुलेंस आपात स्थिति में उपलब्ध रहेगी।
15:-खांसी जुकाम बुखार तथा संदिग्ध दर्शनार्थी को प्रवेश नही मिल सकेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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