भजनों की धुन पर झूमे दिग्विजय सिंह

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अमिताभ शुक्ल/देवास। तब जबकि कांग्रेस की अंदरूनी खटपट और कलह खुलकर सामने आ चुकी है, दिग्गी राजा एक नये ही अंदाज़ में नज़र आए। मुख्य रूप से कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय खेमे में बंटी कांग्रेस में कमलनाथ और सिंधिया के बीच की तनातनी अब बस सड़क पर आने को ही हैै। सिंधिया ने अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उरने का ऐलान कर दिया है और कमलनाथ ने भी बड़ी ही बेरूखी से कह दिया कि जो उन्हें करना हो वो करें। ऐसे में इस त्रिकोण के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बड़े ही कूल-अंदाज़ में दिखे। शनिवार रात देवास में वो न सिर्फ एक भजन संध्या में शामिल हुए, बल्कि झूमते हुए भी नज़र आए। वे यहां खाटू श्याम भगवान की भजन संध्या में शामिल हुए जो सयाजी द्वार पर आयोजित की गई थी। इस दौरान उन्होने पहले पूजा की और फिर भजनों की धुन पर भक्तिभाव मे डूबकर झूमते हुए दिखे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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