हाटपिपल्या में ‘महाराज’ ने सम्भाला मोर्चा, कर रहे धुंआधार प्रचार

हाटपिपल्या में ‘महाराज’ ने सम्भाला मोर्चा, कर रहे धुंआधार प्रचार

देवास/हाटपिपल्या, सोमेश उपाध्याय| हाटपिपल्या उपचुनाव (Hatpipliya Byelection) में अनेको सियासी रंग देखने को मिल रहे है| पिछले दिनों हाटपिपल्या विधानसभा में उपचुनाव की कमान देवास विधायक राजमाता गायत्रीराजे पँवार (Gayatri Raje Pawar) को मिली थी। पंवार पिछले दिनों हाटपिपल्या में आयोजित सीएम की सभा मे अनुपस्थित थी। इस कारण पंवार की नाराजगी के कयास लगाए जा रहे थे|

दरअसल पैलेस यानी देवास राजघराने व दीपक जोशी की कभी नही पटी। पँवार की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें ही उपचुनाव का प्रभारी बना दिया गया| पंवार दिवगन्त मंत्री व सीएम के खास रहे स्व.तुकोजी राव पँवार की पत्नी है| राजमाता को कमान मिलने के बाद से ही महाराज यानी विधायक पुत्र विक्रम सिंह पंवार ने कमान संभाले हुए तूफ़ानी दौरे शुरू कर दिए है| वे लगातार विधानसभा क्षेत्र का दौरा, बैठक व जनसम्पर्क करते दिखाई दे रहे है| उपचुनाव में महाराज की एंट्री से माहौल में गर्माहट आ गई है। पंवार के साथ युवाओ की बड़ी लॉबी काम कर रही है|

देवास रियासत से जुड़ा है सिंधिया का कनेक्शन
देवास रियासत के ग्वालियर महाराज से पारिवारिक सम्बन्ध रहे है। यही कारण था कि दिवगन्त पंवार के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया काँग्रेस में रहते हुए कभी भी देवास प्रचार के लिए नही आए| अब सिंधिया भाजपा में है ,और हॉटपिपल्या का चुनाव भी सीधे तौर पर सिंधिया की प्रतिष्ठा से जुड़ा है| ऐसे में देवास पैलेश की जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई है यही कारण है कि विधायक पँवार और उनके पुत्र जी जान से मैदान सम्भाले हुए है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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