यहां भी शुरू हुआ मुरारी बापू का विरोध, एफआईआर की माँग

यहां भी शुरू हुआ मुरारी बापू का विरोध, एफआईआर की माँग

देवास।सोमेश उपाध्याय।

यादव समाज देवास (Yadav Samaj Dewas) द्वारा पुलिस अधीक्षक देवास (Superintendent of Police Dewas) को ज्ञापन सौपा । प्रवचनकार मुरारी बापू (murari bapu) के द्वारा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण (Yogeshwar Bhagwan Shri Krishna)  के संबंध में एवं भगवान बलराम जी और उनके परिवार के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी ।उसके विरोध में यादव समाज देवास द्वारा पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौपकर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की ,यह अभियान केवल एक समाज का नही है पूरी सनातन परम्परा का अभियान है ।

व्यास पीठ पर बैठा हुआ कोई वक्ता हमारे धार्मिक मान बिंदुओं को आहत करेगा उसका इसी तरह विरोध किया जाएगा । भारतवर्ष के सनातन परम्पराओ को मानने वाले समस्त हिंदू धर्मावलंबियों से आग्रह किया गया कि वे भी इस तरह के कुकृत्यों का कड़ा विरोध करे ऐसे प्रवचनकारो का सामाजिक रूप से बहिष्कार करें ,सनातन धर्म के संतों,कथावाचकों,धर्माचार्यो,श्रोताओं एव समस्त समाजजनों को एक होकर विरोध करना चाहिए । ज्ञापन देते समय समाज के पदाधिकारीगण नंदकिशोर यादव पह.(जिलाध्यक्ष अभा.ग्वाल महासभा)श्री शशिकांत यादव (राष्ट्रीय कवि),श्री राजेश यादव(पूर्व जिला महामंत्री),श्री नरेन्द्र यादव लल्ला(प्रदेश सचिव अभा.यादव महासभा),डॉ श्री जसमत सिंह यादव(पूर्व जिलाध्यक्ष अभा.यादव महासभा) श्री राजेश यादव (पूर्व पार्षद),श्री महेश यादव(राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अभा ग्वाल महासभा),श्री दुर्गेश यादव (शहर अध्यक्ष अभा यादव महासभा)संतोष यादव (युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष अभा ग्वाल महासभा),जय यादव,दीपक यादव,गजधर यादव,कृष्णकांत यादव,किशोर यादव,जितेंद्र यादव,अखिलेश यादव,जितेंद्र पटेल, अंकित यादव,रोहित यादव आदि उपस्थित थे उक्त जानकारी कपिल यादव द्वारा दी गयी ।।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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