लोगों की मनमानी पर पुलिस का जवाब- “आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम”

लोगों की मनमानी पर पुलिस का जवाब- “आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम”

देवास/अमिताभ शुक्ला

तमाम अपील, हिदायत और सख्ती के बाद भी लोग हैं कि बाज़ नहीं आ रहे, अब भी कई लोग बेवजह सड़कों पर निकल रहे हैं। इन्हें रोकने के लिये अब पुलिस को अलग अलग तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। देवास में पुलिस ने सड़क पर निकले लोगों को कुछ इसी तरह समझाया।

इस समय जब किसी का भी घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं, पुलिस पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रही है, इनमें महिला पुलिसकर्मी भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही हैं। देवास में इन पुलिसकर्मियों ने सड़कों पर निकले लोगों से उठक बैठक लगवाई और सख्ती से घर में रहने की ताकीद की। वही कुछ लोगों को पुलिस ने डंडे से हल्के से धकियाना भी पड़ा, उनके पैरों और वाहनों पर हल्के से डंडे से धकियाते हुए पुलिस ने सभी को घर के अंदर रहने के लिये डपटा। शहर के सयाजी द्वार, भोपाल चौराहे, नावेल्टी चौराहा सहित अन्य मार्गों पर पुलिस ने लोगों को लाठी डंडे के दम पर घरों में भेजा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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