देवास: आज से कर सकेंगे माता टेकरी पर दर्शन, सामूहिक पूजा पर रोक

देवास: आज से कर सकेंगे माता टेकरी पर दर्शन, सामूहिक पूजा पर रोक

देवास।सोमेश उपाध्याय।

कोरोना के खौफ के बाद जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर वापस लौट रही है। करीब ढाई महीने बाद आज से देवास शहर सहित अंचल के मंदिरों में भगवान के दर्शन करने की कामना पूरी होने जा रही है।आज से फिर मन्दिर,मस्जिदों में आराधना और इबादत का दौर शुरू हो जाएगा। । लेकिन कंटेनमेंट जोन में केवल अत्यावश्यक सेवाओं की ही अनुमति मिली है।

नही बजेगी घँटी -मंदिरों में केवल दूर से ही भगवान के दर्शन करने की अनुमति होंगी।भगवान को स्पर्श करना व घँटी बजाने पर पाबंदी रहेगी।माता टेकरी पर गेट पर साबुन पानी से हाथ धाेने की व्यवस्था रहेगी। थर्मल स्क्रीनिंग भी हाेगी। हाथ धाेना अाैर स्क्रीनिंग कराना अनिवार्य है।यहां कतार में 6 फीट की दूरी पर लगे गाेलाें में ही खड़ा हाेना हाेगा।वही बागली क्षेत्र के प्रसिद्ध जटाशंकर तीर्थ पर भी दर्शन आरम्भ होंगे।पर मास्क पहनना अनिवार्य है।छत्रपति हनुमान मन्दिर,कर्णेश्वर महादेव मंदिर सहित जिले भर के तमाम मंदिरों के पट आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे।पर प्रसासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए है।जिले में प्रसासनिक अधिकारीयो द्वरा 1 दिवस पूर्व पंडे-पुजारियों की बैठक भी ली थी।बागली में महिलाओं द्वारा शाम 7 बजे दर्शन कर दीपक लगाने की योजना बनाई है।मस्जिद प्रबंधन समिति को भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर नमाज पढ़ने की अनुमति दी है।जिला प्रसासन की अपील है कि सभी श्रद्धालू नियमो का पालन कर सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करे ताकि जिला सुरक्षित रहे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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