हाटपिपल्या में उपचुनाव के सियासी रंग, कांग्रेस कर रही विरोध प्रदर्शन तो भाजपा जुटा रही समर्थन

हाटपिपल्या में उपचुनाव के सियासी रंग, कांग्रेस कर रही विरोध प्रदर्शन तो भाजपा जुटा रही समर्थन

देवास/हाटपिपल्या, सोमेश उपाध्याय| देवास जिले की हॉटपिपल्या विधानसभा में उपचुनाव की तारीख घोषित होने के पहले ही सियासी रंग दिखने लगे है!दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपने तेवर में मैदान सम्भाले हुए है!केंद्र शासन द्वारा हाल ही में पारित किसान बिल के विरोध में यूथ कांग्रेस द्वारा सरकार विरोधी नारों के बीच मशाल रैली निकाली गई|

कांग्रेस द्वारा विरोध प्रदर्शन कर बिल को किसान विरोधी बता कर आंदोलन किया गया तो भाजपा द्वारा भी संगठनात्मक स्तर पर तैयारीया की जा रही है!गुरुवार को ही भाजपा विधायक पहाड़ सिंह कन्नौजे ने भी मैदान संभालते हुए जनसम्पर्क शुरू किया।विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ हाटपिपल्या विधानसभा के गाँव लसूड़िया, गुराड़िया, देवगढ़,खजूरिया बिना का दौरा कर लोगो के सम्पर्क जुटाया।भाजपा नेताओं द्वारा बिल को किसानों के हित मे बताते हुए कहा की इस बिल से किसान अधिक सक्षम बनेगा!बरहाल चुनावी तारीखों की घोषणा तो नही हुई है पर राजनीतिक दलों ने कमर जरूर कस ली है!भाजपा में जहा यह सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा से जुड़ी है तो काँग्रेस में खुद पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को जिम्मेदारी दी गई है!कांग्रेस प्रत्याशी राजवर्धन सिंह बघेल खुद दिग्विजय सिंह के खेमे के माने जाते है!हालांकि दोनों दलों में बागियों की भी कमी नही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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