Teachers Day पर यहां क्यों सड़कों पर उतरे शिक्षक, कहा क्या शिक्षक होना जुर्म है..?

Teachers Day पर यहां क्यों सड़कों पर उतरे शिक्षक, कहा क्या शिक्षक होना जुर्म है..?

देवास, अमिताभ शुक्ला| आज जहाँ पूरा देश गुरुजनो के सम्मान में शिक्षक दिवस (Teachers Day) मना रहा है,वही देवास में प्रायवेट स्कूलो (Private School) में पढ़ाने वाले टीचर हाथो में तख्तियाँ लेकर सड़को पर उतर गए और देवास के कलेक्टर कार्यालय पहुचकर एक ज्ञापन प्रदेश के मुखिया के नाम सौपा । इस दौरान जमकर नारेबाजी भी शिक्षको ने की ।

भारतीय टीचर एसोसिएशन (BTA) के बैनर तले CM के नाम ज्ञापन सौपने पहुचे शिक्षको का कहना था,कि पिछले कई माह से स्कूलों के बन्द होने से निजी स्कूलो में पढ़ाने वाले टीचरो की आर्थिक हालत बद से बदतर हो गयी है ।

BTA की जिला अध्यक्ष आदित्या सुनील का कहना था,कि निजी स्कूलो के शिक्षको को पिछले 6 माह से वेतन नही मिला है,ऐसे में कोई कैसे अपने परिवार का पालन पोषण करे । यही कारण है,कि आज हमे शिक्षक दिवस के दिन सड़को पर उतरना पड़ा । साथ ही कहा,कि हमारी मांग है, कि मुख्यमंत्री राहत कोष से निजी शिक्षको के लिए राहत पैकेज प्रदान किया जाए ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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