धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए फैसले के बाद पूजन पाठ शुरू हो गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को साध्वी ऋतम्भरा दीदी भी धार पहुंची जहां उन्होंने भोजशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन किए। इस मौके पर उन्होंने हिन्दू श्रद्धालुओं को संबोधित भी किया।
मीडिया से बातचीत करते हुए साध्वी ऋतम्भरा दीदी ने कहा कि भोजशाला का निर्णय आने के बाद अब हम राजा भोज के समय के वैभव को दोबारा देखेंगे। वैभव सिर्फ भवनों से नहीं होता। इस धरती ने ज्ञान, विज्ञान, कला और संगीत से पूरे भारत को सजाया है। उन्होंने कहा कि साधारण सी बात है कि तथाकथित मौलाना पहले हुए थे या राजा भोज? इसी धरती ने विद्वानों, साहित्यकारों और काव्य के महान नायकों को जन्म दिया है।
साध्वी ऋतम्भरा ने पौराणिक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे प्रहलाद आग में जलाए गए पर जला नहीं पाए वैसे ही भोजशाला का सत्य अग्नि परीक्षाओं से गुजर-गुजर के उस सत्य को उसके पक्ष को समझते हुए भोजशाला हिन्दू समाज को सौंपी गई है। उन्होंने आगे कहा कि साधारण सी बुद्धि की बात है कि तथाकथित मौलाना पहले हुए थे या राजा भोज पहले हुए थे? इतिहास कह रहा है कि राजा भोज पहले हुए थे।
साध्वी ऋतंभरा ने भोजशाला पर आए निर्णय को बताया सत्य की विजय का प्रतीक
साध्वी ऋतंभरा ने आगे कहा, धार नगरी वही पावन धरती है, जिसने अनेक विद्वानों, साहित्यकारों और काव्य के महान नायकों को जन्म देकर देश को गौरवान्वित किया। यही वह भूमि भी है जिसने इतिहास में जौहर जैसी त्रासदियों और सामूहिक अत्याचारों का दर्द भी सहा है। समय का प्रभाव रहा हो, विधर्मियों की बेशर्मी रही हो या अनाधिकार चेष्टाएं और हत्याओं का सिलसिला लेकिन सबसे बड़ी प्रसन्नता की बात यह है कि जब-जब दीप बुझाने की कोशिश हुई, तब-तब हिंदू समाज ने उन्हें फिर से प्रज्वलित किया। जितनी बार आंधियां चलीं, उतनी ही बार दीप जलाए गए। भोजशाला के सत्य के समर्थन में आया निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सत्य अंत में विजयी होता है।
साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि हम एक बार फिर राजा भोज के समय का वैभव यहां देखेंगे। वैभव क्या होता है यह ईमारतों से नहीं पता लगाया जा सकता। इमारतें वैभव की अभिव्यक्ति का एक माध्यम हो सकती हैं लेकिन किसी भी सभ्यता का वास्तविक वैभव उसके ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, काव्य, संगीत और कला में निहित होता है।
लंदन से जल्द आएगी माँ वाग्देवी की मूर्ति: साध्वी ऋतम्भरा
उन्होंने कहा कि धार की इस पावन धरती ने इन्हीं मूल्यों से पूरे भारत को समृद्ध और अलंकृत किया है। हमें विश्वास है कि भोजशाला एक बार फिर पूरे भारत के सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा के नेतृत्व का केंद्र बनेगी। बहुत जल्दी सब कुछ होगा। बहुत जल्द माँ वाग्देवी आना चाहती है। माँ अधीर होके कह रही हैं कि मुझे लंदन से चलकर धार आना ही है क्योंकि मैं भारत को भारत बनाए रखना चाहती हूं इसलिए भगवती जल्दी आएंगी।





