Battle Of Galwan के टीजर में सलमान की मुस्कान देख भड़के यूजर्स, इस शख्स ने किया सपोर्ट

जब बैटल ऑफ गलवान का टीजर रिलीज किया गया तो दर्शकों ने इसे बहुत पसंद किया। हालांकि, कुछ लोग सलमान की स्माइल पर सवाल उठाते दिखाई दिए। अब पोलिटिकल एनालिस्ट तहसीन पूनावाला ने इसकी वजह बताई है।
Battle of Galwan

सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ़ गलवान का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। एक्टर के बर्थडे के दिन इस फिल्म का टीजर रिलीज कर फैंस को एक बड़ा सरप्राइज दिया गया। जैसे ही यह वीडियो सामने आया लोगों से इसे पसंद तो किया लेकिन एक्टर के रिएक्शन ने ध्यान भी खींच लिया।

सलमान की पिछली फिल्म सिकंदर बॉक्स ऑफिस पर धमाल नहीं मचा पाई थी। अब इस अपकमिंग फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीद है। जब टीजर सामने आया तब एक्टर के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर कई लोग हैरान थे। दरअसल, यह वॉर पर आधारित फिल्म है, ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स यह सवाल उठा रहे थे कि इस सिचुएशन में मुस्कुराने वाला एक्सप्रेशन क्यों जरूरी था। इसे लेकर कुछ लोगों ने एक्टर को ट्रोल करना शुरू कर दिया था। अब इसकी वजह सामने आ गई है।

सलमान की स्माइल पर उठे सवाल

टीजर सामने आने के बाद सलमान खान की मुस्कान पर कई लोग सवाल उठाते हुए दिखाई दिए। इस मामले पर अब पॉलीटिकल एनालिस्ट तहसीन पूनावाला को एक्टर का बचाव करते हुए देखा गया। अपने एक हैंडल पर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि “जो लोग बैटल ऑफ गलवान के टीजर में सलमान खान की मुस्कान के लिए ट्रोल कर रहे हैं, वो समझ नहीं रहे हैं। यह कैजुअल नहीं है यह शांत स्वभाव है, शांत आक्रामकता है।”

पूनावाला ने आगे कहा कि “यह एक सैनिक का लुक है जो समझता है कि वह कहां जा रहा है और दुश्मन के ठीक सामने होने के बावजूद भी घबराने से मना कर देता है। जब कोई सैनिक मैदान में उतरता है तो या तो वह जितना है और देश की रक्षा करता है या फिर खुद को कुर्बान कर देता है। उनके लिए दोनों ही जीत है।” आखिर में तहसीन ने कहा “टीजर की लाइन उस सोच को साफ करती है जवानों याद रहे जख्म लगे तो मैडल समझना और मौत दिखे तो सलाम करना.. आज नहीं तो फिर कभी। मौत से क्या डरना उसे तो आना ही है। सलमान की मुस्कान कमजोरी नहीं है बल्कि स्वीकार करने की हिम्मत है। अगर फिल्म यही टोन बनाए रखती है तो इसमें बहुत पोटेंशियल है।”

कब आएगी फिल्म

अगर आप भी सलमान खान की इस फिल्म को देखना चाहते हैं तो यह 17 अप्रैल 2026 को सिनेमाघर में रिलीज की जाने वाली है। यह गलवान घाटी में हुई भारतीय और चीन सैनिकों की भिड़ंत की असली कहानी पर बनी फिल्म है।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
Follow Us :GoogleNews