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एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता का हुआ निधन, दिल्ली में किया गया अंतिम संस्कार

Written by:Gaurav Sharma
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बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के पिता सुनील मल्होत्रा का दिल्ली में निधन हो गया है। वे मर्चेंट नेवी के पूर्व कप्तान थे। दुखद खबर मिलते ही सिद्धार्थ अपनी पत्नी कियारा आडवाणी के साथ तुरंत दिल्ली पहुंचे और परिवार के साथ इस मुश्किल समय में मौजूद हैं।
एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता का हुआ निधन, दिल्ली में किया गया अंतिम संस्कार

नई दिल्ली: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता, सुनील मल्होत्रा का दिल्ली में निधन हो गया है। सुनील मल्होत्रा मर्चेंट नेवी के पूर्व कप्तान थे। खबर मिलते ही सिद्धार्थ अपनी पत्नी और अभिनेत्री कियारा आडवाणी के साथ तुरंत मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

दिल्ली में हुआ अंतिम संस्कार

जानकारी के अनुसार, सुनील मल्होत्रा ने शनिवार को दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। हालांकि, यह खबर तुरंत सार्वजनिक नहीं हुई थी। उनका अंतिम संस्कार परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में दिल्ली में ही संपन्न हुआ। यह समय सिद्धार्थ और उनके पूरे परिवार के लिए बेहद मुश्किलों भरा है, और दोनों पति-पत्नी इस दुख की घड़ी में परिवार को संभालने के लिए दिल्ली में ही रुके हुए हैं।

लंबे समय से ठीक नहीं थी तबीयत

सुनील मल्होत्रा पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें सार्वजनिक रूप से व्हीलचेयर पर देखा गया था, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं जाहिर की जा रही थीं। फरवरी 2023 में सिद्धार्थ और कियारा की शादी के दौरान भी वह व्हीलचेयर पर ही नजर आए थे, जहां परिवार उनकी देखभाल करता दिखा था।

इसके अलावा, इसी साल जब सिद्धार्थ की फिल्म ‘योद्धा’ रिलीज हुई, तब भी सुनील मल्होत्रा अपने बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग पर पहुंचे थे। उस समय भी वह व्हीलचेयर पर थे, जिसे देखकर फैंस उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

पिता से दूर रहने का था सिद्धार्थ को मलाल

सिद्धार्थ मल्होत्रा अपने पिता के बेहद करीब थे और उनके स्वास्थ्य को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। उन्होंने पिछले साल एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र भी किया था कि उन्हें काम के सिलसिले में मुंबई में रहना पड़ता है, जबकि दिल्ली में उनकी मां अकेले ही पिता की देखभाल करती हैं। सिद्धार्थ ने इस बात पर अफसोस जताया था कि वह इस मुश्किल समय में अपने पिता के पास ज्यादा वक्त नहीं बिता पा रहे हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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