सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ का ट्रेलर रिलीज, ट्विटर पर ट्रेंड

सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ का ट्रेलर रिलीज, ट्विटर पर ट्रेंड

बॉलीवुड| दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आखिरी फ़िल्म दिल बेचारा (Dil Bechara Trailer) का ट्रेलर आज यानी 6 जुलाई को रिलीज़ हो गया है। संजना संघी और सुशांत सिंह राजपूत की इस फ़िल्म का फैंस को बेसब्री से इंतज़ार था| इस फिल्म की रिलीज डेट सामने आने बाद सही ही लगातार यह फिल्म सुर्खियों में छाई थी| लंबे इंतजार के बाद अब इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया है| जो काफी पसंद किया जा रहा है| ट्रेलर के रिलीज होते ही फिल्म का यह वीडियो यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है| वहीं फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने से पहले सोमवार को ट्विटर पर #DilBecharaTrailer ट्रेंड करता रहा।

सुशांत सिंह राजपूत अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें अभी लोगों के दिलों में ताजा हैं और इस आखिरी फिल्म को देखने के लिए उनके चाहने वाले बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं| ट्रेलर में उनके कई बेहतरीन डायलॉग्स हैं, जिसके जरिए वे फिल्म में कैंसर से जूझ रही एक्ट्रेस संजना सांघी को हंसाने और उनका दुख कम करने की कोशिश करते हैं।

यह फिल्म 24 जुलाई को रिलीज की जाएगी| इस फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा और इस फिल्म को देखने के लिए किसी तरह के सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं होगी| ट्रेलर में सुशांत का एक डायलॉग है, ‘जन्म कब लेना है और कब मरना है, हम डिसाइड नहीं कर सकते। पर कैसे जीना है, ये हम डिसाइड कर सकते हैं।’

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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